काशी में फिर दिखा अद्भुत नजारा… 64 दिन बाद दशाश्वमेध घाट पर मूल स्वरूप में हुई गंगा आरती
वाराणसी। वाराणसी (Varanasi) में मां गंगा (Mother Ganga) की विश्वप्रसिद्ध आरती का भव्य नजारा एक बार फिर दशाश्वमेध घाट (Dashashwamedh Ghat) पर देखने को मिला. बाढ़ के पानी के कारण 64 दिनों से अपने पारंपरिक स्थान (Traditional location) से दूर हो रही गंगा आरती मंगलवार, 20 अक्टूबर को अपने मूल स्थान पर लौट आई. घाट के निर्धारित प्लेटफॉर्म पर आरती शुरू होते ही हजारों श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने पहुंचे. दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और मां गंगा की आराधना से पूरा घाट भक्तिमय हो उठा।
64 दिन तक छत पर हुई गंगा आरती
दरअसल, गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण दशाश्वमेध घाट पर आरती के आयोजन में बदलाव करना पड़ा था. 17 अगस्त से गंगा सेवा निधि की ओर से विश्वप्रसिद्ध आरती संस्था के कार्यालय की छत पर कराई जा रही थी. बाढ़ के पानी के चलते श्रद्धालु घाट के पारंपरिक प्लेटफॉर्म पर आरती का नजारा नहीं देख पा रहे थे. अब जलस्तर में कमी आने के बाद आरती को फिर से उसके मूल स्थान पर शुरू कर दिया गया है।
मंगलवार को जैसे ही दशाश्वमेध घाट पर पारंपरिक तरीके से आरती संपन्न हुई, वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच उत्साह देखने को मिला. बड़ी संख्या में लोग मां गंगा की आरती में शामिल हुए. काशी की पहचान मानी जाने वाली इस आरती के अपने पुराने स्थान पर लौटने से घाट पर एक बार फिर रौनक दिखाई दी।
अभी सामान्य नहीं हुआ गंगा का जलस्तर
गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा ने बताया कि मां गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण 64 दिनों तक कार्यालय की छत पर आरती आयोजित की गई. मंगलवार को दशाश्वमेध घाट के पारंपरिक स्थान पर आरती संपन्न हुई. हालांकि, गंगा का जलस्तर अभी भी सामान्य से करीब 10 से 15 फीट अधिक बताया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पक्के घाटों का संपर्क एक बार फिर जुड़ गया है. आगामी पर्वों को देखते हुए घाटों की सफाई भी कराई जा रही है. बाढ़ के कारण बदली व्यवस्था के बाद गंगा आरती का अपने मूल स्थान पर लौटना काशी के श्रद्धालुओं के लिए राहत और आस्था से जुड़ा खास अवसर है।
