उत्तराखंड के नए राज्यपाल बने डॉ. ढाल सिंह बिसेन, जानें हर वो बात जो आप जानना चाहते हैं
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लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह संभालेंगे पद
राष्ट्रपति दौपदी मुर्मु ने सोमवार को 6 राज्यों के राज्यपालों की नियुक्ति की घोषणा की। राष्ट्रपति की ओर से उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर डॉ. ढाल सिंह बिसेन की नियुक्ति की है। डॉ. बिसेन उत्तराखंड के 9वें राज्यपाल होंगे।
बता दें कि डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के बालाघाट से लोकसभा के पूर्व सांसद हैं। व पूर्व कैबिनेट मंत्री भी रहे हैं। वह म.प्र. सरकार में वन, परिवहन, खनिज साधन, स्कूल शिक्षा, जेल विभाग संभाल चुके हैं। वह सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की जगह लेंगे।
उत्तराखंड में अब तक रहे राज्यपाल
सुरजीत सिंह बरनाला- 09 नवंबर 2000- 07 जनवरी 2003
सुदर्शन अग्रवाल- 08 जनवरी 2003- 28 अक्टूबर 2007
बनवारी लाल जोशी- 29 अक्टूबर 2007- 05 अगस्त 2009
मार्गरेट अल्वा- 06 अगस्त 2009 – 14 मई 2012
अज़ीज़ कुरैशी- 15 मई 2012 – 08 जनवरी 2015
कृष्ण कांत पॉल- 08 जनवरी 2015- 25 अगस्त 2018
बेबी रानी मौर्य- 26 अगस्त 2018- 08 सितंबर 2021
लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह- 15 सितंबर 2021 – अक्टूबर 2026
सीएम धामी ने दी बधाई
डॉ. ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड के नए राज्यपाल के पद पर नियुक्ति मिलने पर सीएम धामी ने उन्हें बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ ढाल सिंह बिसेन का दीर्घ राजनीतिक अनुभव, जनसेवा के प्रति समर्पण तथा सार्वजनिक जीवन में उनका उल्लेखनीय योगदान प्रेरणादायी है।
मध्य प्रदेश सरकार में पूर्व कैबिनेट मंत्री, पूर्व सांसद एवं भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता के रूप में उन्होंने जनहित और समाजसेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डॉ. ढाल सिंह बिसेन के अनुभव एवं मार्गदर्शन से उत्तराखण्ड के विकास को नई दिशा मिलेगी तथा राज्य की विकास यात्रा को और गति प्राप्त होगी।
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ऐसे समझें: कौन हैं डॉ. ढाल सिंह बिसेन?
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व सांसद डॉ.ढाल सिंह बिसेन का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में 14 मई 1952 को हुआ था। बिसेन पेशे से आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के चिकित्सक रहे हैं। चिकित्सा क्षेत्र से निकलकर उन्होंने राजनीति में लंबा और सफर तय किया है। वे मध्य प्रदेश की राजनीति के एक स्थापित स्तंभ रहे हैं। डॉ.बिसेन ने वर्ष 1990 में पहली बार विधायक बनने के बाद 1993, 1998 और 2003 में भी विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। उन्होंने वर्ष 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद उन्होंने 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष का दायित्व भी बखूबी संभाला। उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव बालाघाट लोकसभा सीट से जीता। हालांकि 2024 में पार्टी ने उनकी जगह नया चेहरा चुनावी मैदान में उतारा था। संगठन के प्रति उनकी अटूट निष्ठा और समर्पण का इनाम अब पार्टी ने उन्हें राज्यपाल बनाकर दिया है।
