October 12, 2026

दीवाली से पहले चावल, चीनी और दालों की कीमतों में तेजी, खराब मौसम और महंगी ढुलाई से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित

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नई दिल्ली ।दीवाली से पहले खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतें आम लोगों के घरेलू बजट पर दबाव डाल रही हैं। चावल, चीनी, दाल और खाने के तेल समेत कई कृषि उत्पादों के दाम में तेजी देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इन वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके पीछे खराब मौसम, फसलों के उत्पादन में संभावित कमी, अंतरराष्ट्रीय तनाव और सामान की ढुलाई महंगी होने जैसे कारण बताए जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान खाद्य वस्तुओं की मांग के बीच आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है।

चावल की कीमतों में तेजी विशेष रूप से उल्लेखनीय है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के दाम पिछले दो वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। इसकी प्रमुख वजह बाजार में आपूर्ति कम होना और माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की लागत बढ़ना बताई जा रही है। कंटेनर के जरिए सामान भेजने का खर्च पांच हजार डॉलर से बढ़कर करीब 55 हजार डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख किया गया है। इससे अंतरराष्ट्रीय कारोबार की लागत में बड़ा अंतर आया है और खाद्य वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है।

खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुमान के अनुसार, दुनिया में चावल का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में 2.4 प्रतिशत घट सकता है। भारत में भी उत्पादन कम होने का अनुमान जताया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, देश में चावल का उत्पादन 15.4 करोड़ टन से घटकर 14.4 करोड़ टन रह सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चावल के वायदा भाव में 30 से 70 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की बात कही गई है। उत्पादन में संभावित गिरावट और आपूर्ति की बढ़ती लागत का असर बाजार की कीमतों पर पड़ रहा है।

चीनी के बाजार में भी तेजी बनी हुई है। अक्टूबर में कच्ची चीनी के वायदा भाव करीब 8 प्रतिशत बढ़े हैं। वहीं, जुलाई में दर्ज निचले स्तर से कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ब्राजील, भारत, थाईलैंड और यूरोपीय संघ में खराब मौसम के कारण चीनी उत्पादन में 10 से 20 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका जताई गई है। यूरोपीय संघ में उत्पादन 19 प्रतिशत और थाईलैंड में 17 प्रतिशत तक घट सकता है। यदि उत्पादन में यह गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है।

खाने के तेल की कीमतों पर भी वैश्विक ऊर्जा बाजार का असर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी परिस्थितियों के बीच जैव ईंधन की मांग बढ़ रही है। जैव ईंधन बनाने में इस्तेमाल होने वाले वनस्पति तेल की मात्रा भी बढ़ रही है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, दुनिया में इस्तेमाल होने वाले कुल वनस्पति तेल का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा जैव ईंधन उत्पादन में खर्च हो रहा है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान में जैव ईंधन के लिए वनस्पति तेल का इस्तेमाल 30 से 32 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना जताई गई है। इससे खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है।

दालों और अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले एक वर्ष में चने के दाम 23 प्रतिशत, उड़द के 24 प्रतिशत और मटर के 47 प्रतिशत तक बढ़े हैं। इनकी कीमतों में तेजी के पीछे आयात पर अधिक शुल्क को भी एक कारण बताया गया है। इसके अलावा, जौ की कीमतों में 44 प्रतिशत, मक्का में 9 प्रतिशत और चाय में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

खराब मौसम के कारण कृषि उत्पादन प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय तनाव से परिवहन तथा आपूर्ति व्यवस्था में रुकावट आने की स्थिति में महंगाई का दबाव आगे भी बना रह सकता है। चावल, चीनी, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ सकता है। हालांकि, आने वाले समय में कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह उत्पादन, उपलब्धता और ढुलाई की लागत में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

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