MP में ग्वालियर-चंबल में 2 दिन बारिश की संभावना, 15 अक्टूबर से करवट बदलेगा मौसम
ग्वालियर-चंबल के पांच जिलों में बारिश के आसार
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में बारिश होने का अनुमान है। इन इलाकों में तेज आंधी के साथ पानी गिरने की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में भी एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से 15 अक्टूबर के बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में दोबारा बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है।
इससे पहले शनिवार को सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी जिलों में हल्की बारिश हुई। इन क्षेत्रों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर आंधी का असर भी देखने को मिला।
इंदौर में सबसे ठंडी रात, भोपाल-पचमढ़ी में पारा 16.8 डिग्री
बारिश और मौसमी बदलाव के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा। अमरकंटक में 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री तथा कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन के समय तेज धूप और गर्मी का असर बना हुआ है। बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है। दिन में धूप निकलेगी, जबकि रात के तापमान में गिरावट के कारण ठंडक महसूस होगी।
3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और अन्य मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण कुछ जिलों में बारिश हो रही है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह के मौसम का रुझान देखा गया है। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में दिन के समय धूप और गर्मी रही, जबकि रात में ठंडक बढ़ी है। साथ ही, कुछ जिलों में बारिश भी दर्ज की जा रही है।
इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। हालांकि, पूरे सीजन में हुई बारिश सामान्य औसत से कम रही।
मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश
जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम दर्ज की गई।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत के मुकाबले 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।
पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी
प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो चुका है, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।
कम बारिश वाले 30 जिले: नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर।
कुल मिलाकर, मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज धूप का दौर जारी है। फिलहाल उत्तरी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना है, जबकि 15 अक्टूबर के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाला नया सिस्टम मौसम में फिर बदलाव ला सकता है।
