October 5, 2026

गांव का घर साधारण लेकिन सरकारी स्कूल हाईटेक, चीन पहुंचकर भारतीय PhD स्कॉलर ने दिखाया हैरान करने वाला VIDEO

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नई दिल्ली। चीन का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में आधुनिक इमारतें हाईटेक तकनीक तेज रफ्तार ट्रेनें और चमचमाते शहरों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन चीन की एक अलग तस्वीर उसके गांवों में भी दिखाई देती है। चीन में PhD की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र सैयद शेन आलम ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव से जुड़े कुछ वीडियो शेयर किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने चीन के एक गांव के घर से लेकर वहां के सरकारी स्कूल तक की झलक दिखाई है। उनके अनुभव ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है।

सैयद शेन आलम चीन में PhD कर रहे हैं और पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम इंग्लिश टीचर के तौर पर भी काम करते हैं। वह सोशल मीडिया पर चीन की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो साझा करते रहते हैं। इस बार वह अपने एक दोस्त के गांव पहुंचे। दोस्त के परिवार को उनके आने की जानकारी पहले से थी इसलिए उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। शेन ने परिवार की मेहमाननवाजी की तारीफ करते हुए घर के अलग-अलग हिस्सों को वीडियो में दिखाया।

गांव का यह घर बाहर से भले ही सामान्य नजर आता हो लेकिन अंदर कई जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। घर में अलग-अलग कमरे थे और उनमें बेड सोफा अलमारी तथा रोजमर्रा की जरूरत का सामान रखा हुआ था। एक कमरे के बारे में शेन ने बताया कि उनकी दोस्त शादी के बाद इसी कमरे में रहने लगी थीं। हालांकि घर में एक ऐसी चीज भी थी जिसने उन्हें हैरान किया। उनका कहना था कि घर काफी बड़ा होने के बावजूद वहां सिर्फ एक वॉशरूम था। यह वॉशरूम घर के आखिरी हिस्से में बना था और उसका डिजाइन भी कुछ पुराना दिखाई दे रहा था।

शेन ने घर का गेस्ट रूम भी दिखाया जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी की तस्वीर लगी हुई थी। इसके अलावा घर में एक अलग स्थान ऐसा था जहां परिवार के बुजुर्ग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करते थे। शेन ने चीन की नई और पुरानी पीढ़ी के बीच परंपराओं को लेकर अंतर की बात भी कही। उनके मुताबिक गांवों में कई बुजुर्ग आज भी अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को बनाए हुए हैं।

इसके बाद शेन चीन के इसी ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल पहुंचे। यहां का नजारा उनके लिए काफी अलग था। उन्होंने वीडियो में स्कूल की कक्षाएं और बच्चों के लिए मौजूद सुविधाएं दिखाईं। उनके मुताबिक स्कूल में बच्चों से पढ़ाई की फीस नहीं ली जाती है। क्लासरूम में AC की सुविधा के साथ पानी का डिस्पेंसर भी लगा हुआ था। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट बोर्ड और Wi-Fi जैसी सुविधाएं भी दिखाई गईं।

शेन ने बताया कि स्कूल में डिजिटल सुविधाओं के साथ सामान्य बोर्ड का भी इस्तेमाल किया जाता है। यानी शिक्षक जरूरत के अनुसार स्मार्ट बोर्ड के साथ चॉक और सामान्य बोर्ड की मदद से भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं। स्कूल में बच्चों के लिए सरकार की तरफ से मिड डे मील की व्यवस्था होने की बात भी उन्होंने बताई।

शेन के मुताबिक विदेशी छात्रों और लोगों के लिए वॉलंटरी वर्क के अवसर भी मिलते हैं। इसी तरह के एक कार्यक्रम के तहत वह गांव के बच्चों से बातचीत करने और उन्हें कुछ सिखाने के लिए स्कूल पहुंचे थे। उनका अनुभव सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने चीन के ग्रामीण इलाकों और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी।

वीडियो ने यह सवाल भी खड़ा किया कि किसी देश की तस्वीर केवल उसके बड़े शहरों और आधुनिक इमारतों से नहीं समझी जा सकती। गांवों की जिंदगी और वहां की शिक्षा व्यवस्था भी देश के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। शेन आलम के वीडियो में एक तरफ पारंपरिक ग्रामीण घर और पुरानी मान्यताएं दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूल में आधुनिक शिक्षा सुविधाएं नजर आती हैं। यही विरोधाभास चीन के गांवों की एक अलग तस्वीर सामने लाता है।

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