October 4, 2026

आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

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नई दिल्ली । छोटे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा पर आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारतीय बाजार में राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत आरबीआई की नीति, महंगाई को लेकर उसका रुख और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही हो गई थी। सोमवार को सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और अगले दो कारोबारी सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत और गिर गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

तकनीकी संकेतकों के स्तर पर भी बाजार में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक आरएसआई करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,800 और 23,000 के स्तर निफ्टी के लिए निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेंगे। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं।

बाजार की धारणा पर फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में संशोधित आंकड़ा 7.4 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत तथा बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आरबीआई नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अगले सप्ताह बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

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