October 3, 2026

जेल में तोड़ने की कोशिश पर संजय दत्त ने सुनाया किस्सा, बोले- पिता की आंखों में आंसू थे, फिर भी खुद को रखा मजबूत

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नई दिल्ली: संजय दत्त ने जेल में बिताए अपने समय को याद करते हुए बताया कि वहां उन्हें तोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह परिस्थितियों के सामने नहीं टूटे। एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर में आए उतार-चढ़ाव के साथ जेल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को लगता था कि उनके सेलिब्रिटी स्टेटस से जुड़ी सुविधाएं छीन लेने से वह परेशान होकर टूट जाएंगे। हालांकि, संजय दत्त के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ और उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभाले रखा। उन्होंने यह भी बताया कि जेल में उनके साथ व्यवहार और सुविधाओं में हुए बदलावों का उन पर वैसा असर नहीं पड़ा, जैसा अधिकारियों ने सोचा था।

बातचीत के दौरान संजय दत्त से यह भी पूछा गया कि क्या जेल की कठिन परिस्थितियों में कभी उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के बारे में सोचा था। उन्होंने इस सवाल का जवाब साफ तौर पर ‘नहीं, कभी नहीं’ में दिया। इससे पहले बातचीत में उनके जेल में रहने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का जिक्र किया गया था। संजय दत्त ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि वहां मौजूद अधिकारियों को लगता था कि उनके लिए उपलब्ध सुविधाएं छीन लेने से वह टूट जाएंगे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें सिगरेट नहीं मिलने की बात कही गई, तब उन्होंने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बीड़ी मिल सकती है। उनके मुताबिक इस तरह के बदलावों से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा।

संजय दत्त ने जेल जाने से पहले का एक भावुक पल भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने पहली बार उन्हें हथकड़ी पहनाई, तब उनके पिता सुनील दत्त को गहरा झटका लगा था। उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने पूछा था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। संजय दत्त के मुताबिक उन्होंने उस समय अपने पिता को गले लगाया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि हथकड़ी लगना प्रक्रिया का हिस्सा है और उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह थी कि वह खुद भी अंदर से इस स्थिति से प्रभावित थे, लेकिन उस समय उनके लिए अपने पिता के सामने मजबूत बने रहना जरूरी था।

संजय दत्त को साल 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मामले से जुड़े अवैध हथियार रखने के आरोप में टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी TADA और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। उन्होंने अलग-अलग समय में कुल मिलाकर करीब 18 महीने अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताए। साल 2007 में विशेष TADA अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा की अवधि छह साल से घटाकर पांच साल कर दी। जेल के अपने अनुभव को याद करते हुए संजय दत्त ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाले रखा।

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