October 2, 2026

धान परिवहन में 43.03 करोड़ की कथित गड़बड़ी 28 जिलों तक पहुंचा मामला हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

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जबलपुर । मध्य प्रदेश में धान के परिवहन और आपूर्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। जबलपुर में सामने आई कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचने का दावा किया गया है। याचिका में करीब 43.03 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के 28 जिलों से संबंधित जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए ताकि वह उसमें सामने आए तथ्यों का अध्ययन कर अपना पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धान के परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए पहले से GPS व्यवस्था के दिशा निर्देश मौजूद हैं। इसके बावजूद परिवहन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां होने का आरोप लगाया गया है। याचिका में पूरे प्रदेश में मामले की जांच कराने की मांग की गई है।

मामले की शुरुआत जबलपुर में जिला प्रशासन की कार्रवाई से हुई बताई गई है। उपलब्ध अदालती रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर प्रशासन की जांच में 43.03 करोड़ रुपए से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया था। इसके बाद FIR दर्ज होने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि गड़बड़ी केवल जबलपुर तक सीमित नहीं हो सकती है और दूसरे जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिन वाहनों के जरिए धान को निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जाना था उनकी निगरानी व्यवस्था का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हुआ। याचिका में दावा किया गया कि कुछ मामलों में धान निर्धारित स्थान तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बेच दिए जाने की आशंका है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट होगी।

याचिका में एथनोल के लिए आवंटित धान के परिवहन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजे जाने वाले धान को रास्ते में ही दूसरी जगह बेचने की कथित अनियमितता सामने आई। इसी आधार पर पूरे प्रदेश में जांच की मांग की गई है। पहले की सुनवाई में राज्य की ओर से कार्रवाई शुरू होने और FIR दर्ज होने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।

धान की खरीद से लेकर मिलिंग और आपूर्ति तक की प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था होती है। इसमें रिलीज ऑर्डर परिवहन से जुड़े दस्तावेज और परिवहन वाहनों की जानकारी दर्ज करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। याचिका में आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के बावजूद कथित गड़बड़ियां हुईं। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को अलग अलग जिलों में हुई जांच और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में अदालत के सामने रखना होगा।

अदालत ने जांच रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। इससे याचिकाकर्ता पक्ष रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों का अध्ययन कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकेगा। अब 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और उसमें सामने आए तथ्यों पर आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

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