October 2, 2026

MP Politics, नए प्रभारी के सामने संगठन की चुनौतियां, राहुल गांधी के दौरे पर वार-पलटवार, समोसे तलते सांसद ने खींचा ध्यान

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भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों संगठन से लेकर सरकार और विपक्ष तक कई घटनाक्रम एक साथ चर्चा में हैं। भाजपा के नए प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब के पहले दौरे के दौरान संगठन में बेहतर तालमेल और मतभेदों को लेकर दिए गए संदेश ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। देब ने सरकार और संगठन के बीच समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया है। साथ ही पार्टी के अलग अलग स्तरों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को मिलकर काम करने की नसीहत दी है।

बिप्लब देब के दौरे के दौरान पार्टी की संगठनात्मक बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने नेताओं से सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने नहीं लाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े संगठन में मतभेद हो सकते हैं लेकिन इन्हें पार्टी के कामकाज पर हावी नहीं होना चाहिए। इस दौरान संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार रहने पर भी जोर दिया गया।

दरअसल बिप्लब देब को हाल ही में मध्यप्रदेश भाजपा का नया प्रभारी बनाया गया है। उनके सामने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की चुनौती बताई जा रही है। उनके पहले दौरे में ही सरकार और संगठन के बीच समन्वय का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। हालांकि भाजपा नेताओं की ओर से सार्वजनिक तौर पर संगठन में एकजुटता और बेहतर तालमेल पर ही जोर दिया गया है।

इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बालाघाट दौरे को लेकर भी मध्यप्रदेश की सियासत गरमाई रही। राहुल गांधी ने आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखे आरोप लगाए।

राहुल गांधी के दौरे के जवाब में भाजपा नेताओं ने कांग्रेस के पुराने शासन और मौजूदा दौरे को लेकर सवाल उठाए। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने राहुल गांधी के दौरे को राजनीतिक बताया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी कहा कि अगर राहुल गांधी मौजूदा समस्याओं पर सवाल उठा रहे हैं तो कांग्रेस के शासनकाल का हिसाब भी उन्हें देना चाहिए।

इसी राजनीतिक बयानबाजी के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पर की गई टिप्पणी भी चर्चा में रही। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे मामलों में राजनीतिक पलटवार के दौरान नेताओं के बयानों और नामों को लेकर हुई चूक भी चर्चा का विषय बन जाती है।

दूसरी ओर सीधी से भाजपा सांसद राजेश मिश्रा के एक स्थानीय दुकान पर समोसे तलने का वीडियो भी चर्चा में रहा। रिपोर्ट के अनुसार सांसद ने दुकानदार से बातचीत की और उसकी रोजमर्रा की गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। बातचीत के दौरान सरकारी सहायता और पीएम स्वनिधि योजना का भी जिक्र हुआ। इस घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

मध्यप्रदेश भाजपा के भीतर संगठनात्मक बैठकों और आने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों पर भी संगठनात्मक फोकस बढ़ाने की बात कही है जहां उसे 2023 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में नए प्रदेश प्रभारी के सामने संगठन में तालमेल मजबूत करना और जमीनी नेटवर्क को सक्रिय रखना महत्वपूर्ण एजेंडा बना हुआ है।

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