‘मेरा बेटा जिंदा लौटेगा सोचा था, अब उसकी लाश मिली’, मां का छलका दर्द, आश्रम से 10 बार लौटाए जाने का दावा, परिवार में पसरा मातम
परिवार के मुताबिक दीपक पढ़ाई पूरी करने के बाद सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था। उसने लिखित परीक्षा और दौड़ में सफलता हासिल की थी लेकिन शारीरिक परीक्षा में वह चयनित नहीं हो सका। इसके बाद उसका झुकाव धार्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ने लगा। वह गांव में भजन और धार्मिक आयोजनों में सक्रिय रहने लगा था। साल 2023 में वह भय्याजी सरकार दादा गुरु की नर्मदा परिक्रमा सेवा टोली से भी जुड़ा था।
करीब आठ महीने बाद जब दीपक जबलपुर लौटा तो उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई देने लगा। वह बार बार वृंदावन जाने की इच्छा जताता था। परिवार की ओर से आपत्ति के बावजूद फरवरी 2024 में वह वृंदावन चला गया और वहां आश्रम में सेवा करने लगा। कुछ समय बाद उसने अपने माता पिता को फोन कर गुरु दीक्षा लेने की जानकारी दी। उसने परिवार से कहा था कि उसका जबलपुर में मन नहीं लगता और वह आश्रम में रहकर सेवा करना चाहता है।
परिवार का कहना है कि उन्होंने बेटे की इच्छा का सम्मान किया। बाद में दीपक कुछ समय के लिए जबलपुर भी आया लेकिन धीरे धीरे परिवार से उसका संपर्क कम होता गया। उसके पास मोबाइल नहीं रहता था और करीब चार महीने बाद संपर्क पूरी तरह बंद हो गया। जुलाई 2024 में माता पिता और उसका छोटा भाई वृंदावन पहुंचे लेकिन परिवार के अनुसार उन्हें दीपक से मिलने नहीं दिया गया।
परिजनों का दावा है कि इसके बाद वे कई बार वृंदावन गए। परिवार के मुताबिक 10 से ज्यादा बार आश्रम पहुंचने के बावजूद उन्हें गेट से ही वापस लौटना पड़ा। जून 2026 में 17 से अधिक परिजन एक साथ वृंदावन पहुंचे थे लेकिन तब भी दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी। इस दौरान परिवार को जानकारी मिली कि आश्रम में दीपक का नाम रसिक दुलारी शरण हो गया है। परिवार का कहना है कि यह नाम कब बदला गया इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी गई।
दीपक की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार की परेशानी और बढ़ गई। परिजनों के मुताबिक उन्हें फोन पर बताया गया कि दीपक के साथ हादसा हुआ है और वह इमारत से गिर गया है। इसके बाद परिवार वृंदावन के लिए रवाना हुआ। परिवार का आरोप है कि वहां पहुंचने के बाद उन्हें यह पता लगाने में भी काफी परेशानी हुई कि दीपक को किस अस्पताल में ले जाया गया है और उसका शव कहां रखा है।
काफी तलाश के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे जहां उन्हें दीपक का शव मिला। परिवार का कहना है कि शुरुआत में उन्हें केवल हादसे और उपचार की जानकारी दी गई थी। बाद में सामने आई मौत की जानकारी ने परिवार को झकझोर दिया। दीपक की मां का कहना है कि उनका बेटा सेना में जाना चाहता था लेकिन बाद में भक्ति की राह पर चला गया और अब परिवार के पास उसकी यादें ही बची हैं।
परिवार ने पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि दीपक दो साल से परिवार से दूर था और कई बार वृंदावन जाने के बावजूद उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। अब वे यह जानना चाहते हैं कि उसके साथ आखिर क्या हुआ और उसकी मौत से पहले की पूरी परिस्थितियां क्या थीं। मामले में जांच के बाद ही घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
