जबलपुर में भारी बारिश से बरगी बांध लबालब, 17 गेट खोले गए, नर्मदा के घाट डूबे और 10 गांवों का संपर्क टूटा
बरगी बांध के 17 गेट करीब 2.38 मीटर की ऊंचाई तक खोले गए हैं। इन गेटों के जरिए लगभग 6,121 क्यूमेक पानी नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। बांध में पानी का भराव इतना अधिक है कि कई गेटों से पानी तेज बहाव के साथ बाहर निकल रहा है। जलस्तर में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा असर नर्मदा नदी के आसपास के क्षेत्रों पर पड़ा है।
नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण जबलपुर और आसपास के प्रमुख घाटों में पानी भर गया है। नदी के बढ़ते बहाव के चलते घाटों के निचले हिस्से जलमग्न हो चुके हैं। लगातार बारिश और बांध से छोड़े जा रहे पानी के कारण स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।
नर्मदा के बढ़ते जलस्तर का असर नदी किनारे बसे गांवों के आवागमन पर भी पड़ा है। जानकारी के अनुसार बरगी नगर, बिजौरा, बांदरकोला, खापा, बसा, दुर्गा नगर और प्रेम नगर समेत आसपास के करीब 10 गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क टूट गया है। पानी बढ़ने के कारण इन क्षेत्रों में आने-जाने में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन को अलर्ट किया गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से डूब क्षेत्र और जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने तथा नदी और घाटों के आसपास नहीं जाने की अपील की गई है।
नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं। प्रशासन की ओर से जलस्तर और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
भारी बारिश का असर केवल बरगी बांध तक सीमित नहीं है। बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार पानी आने से जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसी वजह से बांध से पानी की निकासी बढ़ानी पड़ी। 17 गेट खोलकर पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा के बहाव में भी तेजी आई है।
प्रशासन की ओर से निचले इलाकों के लोगों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों से जलमग्न घाटों और नदी के तेज बहाव वाले हिस्सों में जाने से बचने को कहा गया है। लगातार बारिश के बीच बांध और नदी के जलस्तर पर निगरानी जारी है।
फिलहाल बरगी बांध से पानी की निकासी जारी है और नर्मदा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। करीब 10 गांवों का संपर्क प्रभावित होने तथा घाटों के जलमग्न होने के कारण स्थानीय स्तर पर सतर्कता बढ़ा दी गई है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
