September 27, 2026

UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते

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नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एक देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और हाल ही में उसने तथ्यों को भी गलत तरीके से पेश किया।

जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना की बात साथ-साथ नहीं चल सकती। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस मुद्दे पर लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखता रहा है।

शांति और सुरक्षा के लिए बना था संयुक्त राष्ट्र
न्यूयॉर्क में UNGA को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विकास और प्रगति भी प्रभावित होती है। वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध और संघर्ष का असर दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। ऐसे में तनाव कम करना और संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा पर जोर
जयशंकर ने कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। इससे पहले भारत और लाइबेरिया की ओर से समुद्री सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा को लेकर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ पहल पर भी जोर दिया गया है। जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में जारी संघर्षों का असर भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी पड़ रहा है।

यूक्रेन युद्ध पर बोले- अंतहीन युद्ध खत्म होना चाहिए
यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए।

जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों का समाधान केवल सैन्य रास्ते से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी यूक्रेन में तत्काल युद्धविराम और लंबे समय तक कायम रहने वाली शांति की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय मदद जारी
पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में मदद कर रहा है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे पर मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के साथ इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा में रहने वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया है।

जयशंकर ने कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध का खत्म होना नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों से घिरी रहेगी तो स्थिरता और सुरक्षा कमजोर होगी। स्थायी शांति के लिए स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना जरूरी है। इनमें से किसी भी आधार को कमजोर करने से शांति की स्थिति भी प्रभावित होगी।

हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही अर्थव्यवस्था और तकनीक
विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रतिस्पर्धा की सोच हावी हो रही है और संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

उन्होंने वित्त और बाजारों तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक को रोकने जैसे कदमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ऐसे उपायों का असर सिर्फ संबंधित देशों तक नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ता है।

ग्लोबल साउथ के सामने 4F का संकट
जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विकासशील देशों के सामने चुनौतियां और गंभीर हैं। उन्होंने ‘4F’ संकट की बात कही। इसमें Food यानी भोजन, Fuel यानी ईंधन, Fertilizer यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।

उनके मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और तनाव का सीधा असर इन चारों क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और देशों के सामने चुनौती यह है कि वे स्थिरता और भरोसे का ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे विकासशील देशों की बुनियादी जरूरतों और विकास पर संकट का असर कम हो।

पश्चिम एशिया में टू-स्टेट सॉल्यूशन पर भारत का रुख
पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन को शांति और सुरक्षा के साथ रहने का रास्ता तलाशने की बात कही जाती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी 81वें महासभा सत्र के दौरान दो-राष्ट्र समाधान को पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का महत्वपूर्ण आधार बता चुके हैं।

जयशंकर के संबोधन में आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, फिलिस्तीन को मानवीय सहायता और ग्लोबल साउथ की आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराने के साथ वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

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