ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती
उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि वर्तमान दौर में न्यायपालिका के सामने कई ऐसी परिस्थितियां सामने आ रही हैं जिनका सामना न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर के शुरुआती दौर में नहीं किया होगा। सोशल मीडिया यूट्यूब और डीपफेक जैसी तकनीकों ने वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करने की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में अदालतों के सामने पेश किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को समझना और उनकी जांच की प्रक्रिया से परिचित होना महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल अपराधों में भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या कृत्रिम सामग्री तैयार करने की संभावनाओं को समझना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। न्यायमूर्ति मिश्रा के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं और आधुनिक तकनीक के प्रभाव को समझने के लिए लगातार सीखते रहना होगा।
न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा को किसी निश्चित पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुभव से यह पता चलता है कि अतीत में क्या हुआ है लेकिन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है जो पहले सामने नहीं आई हैं। बदलते समाज के साथ न्यायपालिका को भी अपनी सोच और समझ का दायरा लगातार बढ़ाना होगा।
सम्मेलन में पुराने कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या और नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा DNA रिपोर्ट वॉयस सैंपल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट जैसे साक्ष्यों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। फॉरेंसिक लैब पुलिस जांच और जेल व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने के लिए फील्ड ट्रेनिंग की जरूरत पर भी विचार किया गया।
न्यायिक प्रशिक्षण में Ethics Logic और Psychology जैसे विषयों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखने की जरूरत बताई गई। सम्मेलन में निष्पक्षता समानता और संवेदनशीलता को न्यायिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाने पर भी मंथन किया गया।
मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का भी उल्लेख किया गया। न्यायिक अकादमी में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर देने की बात सामने आई। इसके साथ ही ADR और Mediation को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
सम्मेलन में मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक रजिस्ट्री अधिकारी और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। सम्मेलन का मुख्य फोकस बदलती तकनीक नए कानून और आधुनिक दौर की न्यायिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों को तैयार करने पर रहा।
