351 बसों को मिली हरी झंडी तो सामने आईं पुरानी तस्वीरें, सीट से लेकर रेडियम तक पर उठे सवाल
सुगम परिवहन सेवा में शामिल 351 बसों में 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस और एयर कंडीशन बताया गया है। इसके अलावा 171 बसें पहले से अलग अलग शहरों में सिटी बस सेवा के रूप में चल रही थीं। भोपाल में ऐसी 58 बसें शामिल हैं। पहले ये बसें लाल रंग में संचालित होती थीं और भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के तहत आती थीं। नई व्यवस्था में इन्हें मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन किया गया है। इसके बाद बसों को एकरूपता देने के लिए इनका रंग बदला गया और उन पर रेडियम लगाया गया।
यहीं से विवाद शुरू हुआ। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कुछ बसों के अंदर सीटों और हैंडल की स्थिति खराब दिखाई गई है। एक बस के ड्राइवर की सीट उखड़ी हुई नजर आई जबकि कुछ हिस्सों में फर्श की हालत भी ठीक नहीं बताई गई। कांग्रेस ने इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुरानी बसों को केवल बाहर से नया रूप देकर सेवा में उतारा गया है।
कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया जिसमें बस की बॉडी पर लगाया गया रेडियम उखड़ता हुआ दिखाई देता है। कांग्रेस नेताओं ने रंगरोगन और रेडियम लगाने के काम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने दावा किया कि बसों की रंगाई पुताई और रेडियम लगाने से जुड़ा टेंडर अभी प्रक्रिया में था और एजेंसी के चयन को लेकर सवाल खड़े किए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।
भोपाल में चल रही कई पुरानी डीजल बसें 2018 और 2019 मॉडल की बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन बसों में पहले भी खराबी और धुआं निकलने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। करीब दस महीने पहले लिंक रोड नंबर एक पर एक सिटी बस में शॉर्ट सर्किट के बाद धुआं उठने की घटना भी हुई थी। हालांकि उस समय यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक पुरानी और नई दोनों तरह की बसों को एक ही व्यवस्था के तहत लाने के कारण सभी बसों को एक जैसा स्वरूप दिया गया है। स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि एकरूपता के लिए संबंधित कंपनी की ओर से बसों पर रंग किया गया है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भी बताया कि बसें अब मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन आ गई हैं।
सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ाना है। पहले साल में 1500 बसें और वर्ष 2031 तक 15 हजार बसें चलाने की योजना बताई गई है। ऐसे में नई सेवा की शुरुआत के साथ उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि बसों के बाहरी स्वरूप के साथ उनकी तकनीकी और अंदरूनी स्थिति पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा। यात्रियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुनिश्चित करने के लिए बसों की नियमित जांच और रखरखाव व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।
