September 26, 2026

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम

0
untitled-1790399029

नई दिल्ली। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना अल्टिमेटम दोहरा दिया है। पार्टी ने कहा है कि अगर शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

कॉकरोच जनता पार्टी लंबे समय से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक अगर शनिवार तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा।

पार्टी ने सोशल मीडिया पर जंतर मंतर पर जुट रहे युवाओं का वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने को कहा है। इससे पहले संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया था लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर 2 अक्टूबर कर दी गई। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने इलेक्शन कमीशन ठीक करो अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।

पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम बाहर हो गए हैं। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। साथ ही पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाएं ताकि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो सके। इसके अलावा पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त कर अधिक पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था बनाने की मांग कर रही है।

इसी बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर चिराग पासवान ने भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन किया है। ऐसे में शनिवार की समयसीमा और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के कारण SIR विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *