September 25, 2026

लिस्टिंग के दूसरे दिन एनएसई शेयरों में गिरावट, शुरुआती तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली को चुना

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नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई के शेयरों में लिस्टिंग के अगले ही दिन शुक्रवार को गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार के बाद शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव दिखाई दिया। कारोबार के दौरान एनएसई का शेयर करीब 1.6 प्रतिशत फिसलकर 1,790 रुपये के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। बाद में यह करीब 1,796 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले लगभग 1.20 प्रतिशत नीचे था।

एनएसई के शेयर गुरुवार को अपने इश्यू प्राइस की तुलना में करीब 0.8 प्रतिशत प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए थे। लिस्टिंग वाले दिन शुरुआती कारोबार अपेक्षाकृत सीमित रहा, लेकिन बाद में शेयर में तेजी आई और दिन के दौरान इसमें 5 प्रतिशत से अधिक का उछाल दर्ज किया गया। कारोबार समाप्त होने तक शेयर करीब 1.8 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन कुछ निवेशकों ने शुरुआती तेजी का लाभ उठाते हुए मुनाफावसूली की।

एनएसई का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम रहा। इससे पहले 2024 में हुंडई मोटर इंडिया का 27,870 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा सार्वजनिक निर्गम था। एनएसई के आईपीओ को भी निवेशकों की ओर से मजबूत प्रतिक्रिया मिली थी।

17 सितंबर से 21 सितंबर तक खुले इस आईपीओ को कुल 5.71 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। 22,568.94 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले करीब 90,287.33 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस मजबूत मांग के बाद कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग को लेकर बाजार में काफी दिलचस्पी बनी हुई थी।

लिस्टिंग के बाद एनएसई का बाजार पूंजीकरण लगभग 4.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस मूल्यांकन के साथ कंपनी भारत की 10वीं सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में शामिल हो गई। बाजार मूल्य के लिहाज से एनएसई ने सन फार्मास्युटिकल्स और टाइटन जैसी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।

बाजार पूंजीकरण के आधार पर एनएसई से ऊपर रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी कंपनियां हैं। इस तरह शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के तुरंत बाद एनएसई का मूल्यांकन देश की बड़ी कंपनियों की सूची में महत्वपूर्ण स्तर पर पहुंच गया है।

लिस्टिंग के बाद शेयर में आई गिरावट को अल्पकालिक मुनाफावसूली के तौर पर देखा जा रहा है। शुरुआती कारोबार में तेजी के बाद कुछ निवेशकों द्वारा मुनाफा बुक किए जाने से शेयर पर दबाव बढ़ा। हालांकि, भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार और एनएसई की बाजार में मजबूत स्थिति के कारण कंपनी को लेकर निवेशकों की दीर्घकालिक दिलचस्पी बनी रहने की बात कही गई है।

एनएसई के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार चौहान ने बताया कि एक्सचेंज एक व्यापक मोबाइल-फर्स्ट प्लेटफॉर्म पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य निवेशकों को ट्रेडिंग डेटा, पोर्टफोलियो से जुड़ी जानकारी और विश्लेषणात्मक सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध कराना है।

कंपनी की आय में ट्रांजैक्शन शुल्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। वित्त वर्ष 2025-26 में एनएसई की परिचालन आय का 78.65 प्रतिशत हिस्सा ट्रांजैक्शन चार्जेज से आया था। यह आंकड़ा कंपनी के मौजूदा कारोबार मॉडल में लेनदेन आधारित आय के महत्व को दर्शाता है। लिस्टिंग के बाद शेयर में शुरुआती उतार-चढ़ाव के बीच अब बाजार की नजर कंपनी के कारोबार और भविष्य के प्रदर्शन पर बनी हुई है।

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