September 24, 2026

व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- संस्थानों को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला

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नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बैन किए जाने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिमोथी केली ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मीडिया संस्थानों को बैन से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

जज केली ने फिलहाल इस मामले में कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह जल्द फैसला सुनाएंगे। तीनों मीडिया संस्थानों ने अदालत से मांग की है कि उनकी व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस अंतिम कानूनी निर्णय आने तक तुरंत बहाल की जाए।

जज ने पुराने अदालती फैसलों का किया उल्लेख

सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के दो पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

केली ने यह भी कहा कि भले ही सरकार इन पुराने अदालती फैसलों को गलत मानती हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज के तौर पर उन्हें फिलहाल इन्हीं कानूनी मिसालों का पालन करना होगा।

उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि मीडिया बैन पहले ही लागू कर दिया गया था, तो उसके बाद भेजे गए पत्र किस तरह संबंधित संस्थानों को पहले से नोटिस देने और अपना जवाब रखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा को बनाया आधार

ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि व्हाइट हाउस में मीडिया की पहुंच कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति को सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से मीडिया संस्थानों की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।

सरकारी वकील ने यह भी दावा किया कि तीनों मीडिया संस्थानों की कुछ रिपोर्टों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हुए थे। प्रशासन ने अपनी दलील के समर्थन में मिसाइल भंडार, व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम और रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म कन्वेंशन से जुड़ी रिपोर्टों का हवाला दिया।

मीडिया संस्थानों ने फर्स्ट अमेंडमेंट का दिया हवाला

CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। तीनों संस्थानों का कहना है कि व्हाइट हाउस का बैन अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दिए गए प्रेस और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के साथ-साथ उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन करता है।

मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन रिपोर्टों के चलते कार्रवाई की, जो राष्ट्रपति को पसंद नहीं थीं।

यह विवाद ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव के बीच सामने आया है। बैन के बाद कई बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्क ने इसके विरोध में व्हाइट हाउस की साझा वीडियो कवरेज रोकने का कदम भी उठाया था।

2018 के जिम एकोस्टा मामले की भी चर्चा

मौजूदा विवाद की तुलना 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा से जुड़े मामले से भी की जा रही है। उस समय भी जज टिमोथी केली ने व्हाइट हाउस को एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने उस मामले में माना था कि प्रेस पास वापस लेने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

अब एक बार फिर व्हाइट हाउस और मीडिया से जुड़े मामले की सुनवाई जज केली के सामने है। फिलहाल अदालत ने CNN, MS NOW और Politico पर लगाया गया बैन हटाने का आदेश नहीं दिया है। मामले में जज केली के अगले फैसले का इंतजार है।

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