बच्चों की कल्पनाओं को मिलेगा शब्दों का आकाश, भोपाल में 26 अक्टूबर को बाल साहित्यकार सम्मेलन
दरअसल, अर्चना प्रकाशन न्यास के तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से बाल साहित्यकार और साहित्यप्रेमी शामिल होंगे। सम्मेलन के साथ बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी और मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को साहित्य के साथ बाल अधिकार, संस्कार, रचनात्मकता और बाल मनोविज्ञान के व्यापक विमर्श से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
देशभर के बाल साहित्यकारों का होगा संगम
भोपाल में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन बाल साहित्य को केंद्र में रखकर देश के विभिन्न क्षेत्रों के रचनाकारों को एक साझा मंच प्रदान करेगा। अर्चना प्रकाशन न्यास की बैठक में सम्मेलन के आयोजन का निर्णय लिया गया। बैठक में मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दवे, अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख कैलाश चन्द्र, मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा, साहित्यकार उमेश सिंह, नुसरत मेंहदी, बाल साहित्यकार महेश सक्सेना, गोपेश्वर बाजपेयी, गोकुल सोनी, मीनू पांडे, गीत धीर, मृदुल त्यागी, सुदर्शन व्यास, देविदयाल सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।
सम्मेलन में प्रदेश के बाहर से आने वाले बाल साहित्यकारों की सहभागिता से मध्य प्रदेश के रचनाकारों को भी देश के अन्य क्षेत्रों में लिखे जा रहे बाल साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इससे विचारों, अनुभवों और रचनात्मक प्रयोगों का आदान-प्रदान संभव होगा।
बाल साहित्य को मनोरंजन तक सीमित करने की जरूरत नहीं
इस बैठक के दौरान इस बात पर भी विमर्श हुआ कि बाल साहित्य बच्चों के मनोरंजन का माध्यम भर नहीं है। वह उनके व्यक्तित्व निर्माण, भाषा विकास, कल्पनाशक्ति, नैतिक बोध और सामाजिक संवेदनाओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कहानी और कविता के माध्यम से बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझना शुरू करते हैं। प्रकृति, परिवार, मित्रता, देश, समाज, विज्ञान, इतिहास और मानवीय संबंधों के प्रति उनकी दृष्टि विकसित होती है।
आज डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बीच बच्चों के पढ़ने की आदत और उनके सामने उपलब्ध सामग्री का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की आवश्यकता और बढ़ जाती है। सम्मेलन इस प्रश्न पर भी सार्थक विमर्श का अवसर दे सकता है कि आज के बच्चे के लिए कैसा साहित्य लिखा जाए, जो उसकी भाषा में हो, उसकी जिज्ञासाओं को समझे और उसे अपनी जड़ों से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति तैयार करे।
बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता से जुड़ेगा संवेदनशील पक्ष
मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सहभागिता इस आयोजन को एक व्यापक सामाजिक संदर्भ प्रदान करती है। बाल साहित्य में बच्चों के अधिकार, सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर, शिक्षा, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति जैसे विषयों को रचनात्मक ढंग से स्थान दिया जा सकता है। बच्चों के लिए लिखने वाले साहित्यकार यदि बाल मन की वास्तविक चुनौतियों को समझकर रचना करें तो साहित्य उनके लिए सिर्फ कल्पना की दुनिया नहीं रहेगा, बल्कि जीवन को समझने का माध्यम भी बनेगा।
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने कहा कि “बाल साहित्य बच्चे के मन तक पहुंचने का सबसे सहज और प्रभावी माध्यम है। एक अच्छी कहानी बच्चे को आनंद देने के साथ ही वह उसके भीतर संवेदना, जिज्ञासा, आत्मविश्वास और सही-गलत को समझने की दृष्टि भी विकसित करती है। बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस प्रकार के प्रयासों को इसलिए महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि बच्चों के अधिकारों की बात कानून और संस्थागत व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती। समाज में बच्चों के प्रति संवेदनशील वातावरण बनाने में साहित्य और संस्कृति की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।”
उन्होंने कहा कि “मध्य प्रदेश में बाल साहित्यकारों और बाल अधिकारों से जुड़े संस्थानों के बीच संवाद बढ़ना प्रदेश के बच्चों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।”
साहित्य अकादमी की सहभागिता से रचनाकारों को मिलेगा मंच
मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी की सहभागिता सम्मेलन को प्रदेश की साहित्यिक गतिविधियों से जोड़ती है। साहित्य अकादमी के निदेशक विकास दावे कहते हैं, अकादमी लंबे समय से प्रदेश में साहित्यिक विमर्श और रचनात्मक प्रतिभाओं को मंच उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों में सक्रिय रही है। बाल साहित्यकार सम्मेलन के माध्यम से प्रदेश के वरिष्ठ और नवोदित बाल साहित्यकारों के बीच संवाद का यहां एक सुखद अवसर बन सकता है।
उन्होंने कहा, यह आयोजन नई पीढ़ी के लेखकों को बाल साहित्य की बदलती जरूरतों को समझने और अपनी रचनाओं को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने के लिए प्रेरित कर सकता है। विशेष रूप से ऐसे समय में जब बच्चों के लिए साहित्य लिखने में भाषा की सरलता के साथ विषयों की आधुनिकता भी आवश्यक हो गई है, साहित्यिक संस्थाओं की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है।
मध्य प्रदेश को क्या मिलेगा
इस संबंध में अर्चना प्रकाशन न्यास के निदेशक ओमप्रकाश गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन का सबसे बड़ा संभावित लाभ यह होगा कि भोपाल बाल साहित्य के राष्ट्रीय संवाद के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत कर सकेगा। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले साहित्यकार अपने अनुभव और रचनात्मक दृष्टि लेकर आएंगे। इससे मध्य प्रदेश के बाल साहित्यकारों को राष्ट्रीय स्तर के रचनाकारों से संवाद का अवसर मिलेगा।
उन्ळोंने बताया कि दूसरा महत्वपूर्ण लाभ प्रदेश के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य की उपलब्धता और उसके प्रति जागरूकता बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। विद्यालयों, पुस्तकालयों, शिक्षकों, अभिभावकों और साहित्यकारों के बीच यदि बाल साहित्य को लेकर संवाद बढ़ता है तो बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को भी बल मिल सकता है। इसके अलावा स्थानीय प्रतिभाओं को सामने लाने का है। मध्य प्रदेश के अनेक छोटे शहरों और कस्बों में बाल साहित्य लिखने वाले रचनाकार सक्रिय हैं। राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन से उन्हें व्यापक मंच मिल सकता है और उनके साहित्य को प्रदेश से बाहर पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
बाल साहित्य प्रदर्शनी होगी आकर्षण का केंद्र
सम्मेलन के अवसर पर बाल साहित्य पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। यह प्रदर्शनी बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और साहित्यप्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन सकती है। बाल पुस्तकों और साहित्यिक सामग्री के माध्यम से यह समझने का अवसर मिलेगा कि अलग-अलग समय में बच्चों के लिए साहित्य किस प्रकार विकसित हुआ है और आज के दौर में उसकी दिशा क्या होनी चाहिए।
ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा
सम्मेलन में भाग लेने के इच्छुक प्रतिभागियों के लिए पंजीयन लिंक जारी किया गया है। प्रतिभागी लिंक पर अपना विवरण भरकर सम्मेलन के लिए पंजीयन करा सकेंगे। आयोजकों की ओर से देश के विभिन्न क्षेत्रों के बाल साहित्यकारों से इसमें सहभागिता का आह्वान किया गया है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब बच्चों की दुनिया तेजी से बदल रही है। मोबाइल स्क्रीन और डिजिटल सामग्री के बीच पुस्तक, कहानी और कविता के साथ बच्चे का रिश्ता बनाए रखना एक बड़ी सामाजिक आवश्यकता बन गया है। यह बाल साहित्यकारों, साहित्यिक संस्थाओं और बाल अधिकारों से जुड़े संगठनों का साझा संवाद बच्चों के लिए ऐसी रचनात्मक दुनिया तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, जहां कल्पना को उड़ान मिले, संवेदना को भाषा मिले और हर बच्चे को अपने सपनों को शब्द देने का अवसर मिले।
