September 20, 2026

सिगरेट नहीं पी फिर भी खतरे में 44.4 करोड़ भारतीय पैसिव स्मोकिंग का चौंकाने वाला आंकड़ा

0
untitled-1789821128

नई दिल्ली। सिगरेट और तंबाकू का धुआं सिर्फ धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के लिए ही नुकसानदायक नहीं होता बल्कि उसके आसपास मौजूद लोगों की सेहत पर भी गंभीर असर डाल सकता है। इसे सेकेंड हैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है। एक नई स्टडी के मुताबिक 2023 में भारत में करीब 44.4 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आए। यह आंकड़ा इसलिए भी चिंता बढ़ाता है क्योंकि इन लोगों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्होंने खुद धूम्रपान नहीं किया है।

दुनियाभर की स्थिति देखें तो 2023 में करीब 271 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में थे। भारत में प्रभावित लोगों की संख्या चीन के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा बताई गई है। चीन में यह आंकड़ा करीब 66.4 करोड़ और इंडोनेशिया में करीब 14.2 करोड़ रहा। भारत चीन और इंडोनेशिया को मिलाकर दुनिया में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने वाली आबादी का बड़ा हिस्सा सामने आता है।

भारत के आंकड़ों में एक महत्वपूर्ण बदलाव भी देखने को मिला है। 1990 में देश में करीब 37.5 करोड़ लोग सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में थे जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 44.4 करोड़ हो गई। हालांकि इसी अवधि में आबादी के अनुपात के हिसाब से सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आने की दर कम हुई है। यानी प्रतिशत में कमी के बावजूद देश की बड़ी आबादी के कारण प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या काफी अधिक बनी हुई है।

इस धुएं का असर केवल सांस लेने में परेशानी तक सीमित नहीं माना जाता। स्टडी में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क को कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जोड़ा गया है। इनमें हृदय रोग फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां स्ट्रोक अस्थमा और कुछ तरह के कैंसर शामिल हैं। लंबे समय तक तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहना शरीर पर लगातार हानिकारक प्रभाव डाल सकता है।

सबसे चिंता वाली बात इससे जुड़ी मौतों का आंकड़ा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 2023 में भारत में करीब 3.26 लाख मौतें सेकेंड हैंड स्मोक से जुड़ी थीं। 1990 में यह आंकड़ा करीब 2.17 लाख था। यानी तीन दशक से ज्यादा समय में सेकेंड हैंड स्मोक से जुड़ी अनुमानित मौतों में काफी बढ़ोतरी हुई है। इसी तरह 2023 में इससे जुड़े स्वास्थ्य नुकसान का अनुमान करीब 9.28 मिलियन DALYs लगाया गया है। यह आंकड़ा समय से पहले होने वाली मौत और बीमारी या विकलांगता के कारण खोए स्वस्थ जीवन वर्षों को दर्शाता है।

बच्चों के लिए सेकेंड हैंड स्मोक विशेष रूप से चिंता का विषय माना जाता है क्योंकि उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं। धुएं में मौजूद हानिकारक पदार्थ उनके श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ा सकते हैं। घर में कोई व्यक्ति नियमित रूप से धूम्रपान करता है तो परिवार के दूसरे सदस्यों के लिए भी धुएं के संपर्क से बचना मुश्किल हो सकता है।

दुनिया में सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क का अनुपात घटने के बावजूद आबादी बढ़ने के कारण प्रभावित लोगों की कुल संख्या अभी भी बहुत बड़ी है। यही वजह है कि केवल धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को ही नहीं बल्कि उसके आसपास रहने वाले लोगों को भी इसके खतरे को समझना जरूरी है। घर ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के संपर्क को कम करना पैसिव स्मोकिंग से बचाव का महत्वपूर्ण तरीका है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *