सिर्फ 250 रुपये से शुरू करें बच्चे के भविष्य की तैयारी, एनपीएस वात्सल्य में बढ़ी अभिभावकों की दिलचस्पी
आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक एनपीएस वात्सल्य से जुड़े बच्चों की संख्या करीब 2.15 लाख थी। मार्च 2025 में यह संख्या लगभग 1.07 लाख थी। यानी एक वर्ष के दौरान योजना से जुड़ने वाले खातों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एनपीएस वात्सल्य के तहत माता-पिता या अभिभावक नाबालिग बच्चे के नाम पर खाता खोल सकते हैं। योजना में निवेश की शुरुआत केवल 250 रुपये से की जा सकती है, जबकि अधिकतम निवेश की कोई निर्धारित सीमा नहीं है। बच्चे के खाते में माता-पिता के अलावा रिश्तेदार और मित्र भी राशि जमा कर सकते हैं।
इस योजना का उद्देश्य कम उम्र से बच्चों के लिए लंबी अवधि का निवेश कोष तैयार करना और उनमें वित्तीय अनुशासन की आदत विकसित करना है। उम्र बढ़ने के साथ लंबे समय तक निवेश जारी रहने से फंड तैयार करने की संभावना बढ़ती है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो एनपीएस वात्सल्य में 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। इस वर्ग के बच्चे कुल खाताधारकों का करीब 36.9 प्रतिशत हैं। इसके बाद 5 से 9 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 31.6 प्रतिशत है।
वहीं 15 से 19 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 21.1 प्रतिशत और 0 से 4 वर्ष के बच्चों की हिस्सेदारी 10.4 प्रतिशत है। इस तरह 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे कुल खाताधारकों में लगभग 68.5 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। इससे पता चलता है कि बड़ी संख्या में अभिभावक बच्चों की शुरुआती उम्र से ही निवेश शुरू कर रहे हैं।
एनपीएस वात्सल्य बाजार से जुड़ी निवेश योजना है। इसमें जमा राशि को विभिन्न निवेश साधनों में लगाया जाता है और अलग-अलग पेंशन फंड अपनी निवेश रणनीति के अनुसार विकल्प उपलब्ध कराते हैं। चुने गए विकल्प के आधार पर इक्विटी में निवेश की हिस्सेदारी काफी अधिक हो सकती है।
बाजार आधारित निवेश होने के कारण इसमें लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना रहती है, लेकिन निवेश का प्रदर्शन बाजार की स्थिति और चुनी गई निवेश रणनीति पर निर्भर करता है। इसलिए इसे निश्चित रिटर्न वाली बचत योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
योजना में कुछ परिस्थितियों में आंशिक निकासी की सुविधा भी उपलब्ध है। खाता खुलने के तीन वर्ष पूरे होने के बाद जमा मूल राशि का 25 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है। इसका उपयोग शिक्षा, चिकित्सा उपचार और निर्धारित विशेष परिस्थितियों में किया जा सकता है। इस सीमा में निवेश से मिलने वाला रिटर्न शामिल नहीं होता।
बच्चे के 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद भी खाते को निर्धारित नियमों के तहत आगे जारी रखा जा सकता है और इसे 21 वर्ष की आयु तक बनाए रखने का प्रावधान है। इसके बाद खाते को सामान्य एनपीएस खाते में बदलने का विकल्प भी उपलब्ध है।
एनपीएस वात्सल्य को अन्य बचत और निवेश विकल्पों के साथ समझना जरूरी है। पीपीएफ अपेक्षाकृत सुरक्षित और सरकार समर्थित बचत विकल्प है, जबकि म्यूचुअल फंड में निवेश और निकासी को लेकर अलग सुविधाएं होती हैं। एनपीएस वात्सल्य का मुख्य जोर लंबी अवधि के निवेश और भविष्य के लिए वित्तीय अनुशासन पर है।
कम शुरुआती निवेश, लंबी अवधि और बाजार आधारित वृद्धि की संभावना के कारण एनपीएस वात्सल्य बच्चों के लिए वित्तीय योजना बनाने वाले अभिभावकों के बीच एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहा है। हालांकि निवेश से पहले जोखिम, अवधि, निकासी नियम और उपलब्ध विकल्पों को समझना जरूरी है।
