हाईकोर्ट से विदाई के साथ समाजसेवा का संकल्प: पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह PM राहत कोष में देंगे एक करोड़ रुपए
फेयरवेल कार्यक्रम में जस्टिस सिंह ने अपने इस फैसले के पीछे पत्नी इंदिरा की इच्छा को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी चाहती थीं कि रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए कुछ किया जाए। इसी भावना का सम्मान करते हुए दोनों ने यह संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि GPF की राशि उनके बैंक खाते में आते ही उसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। उनका यह फैसला कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया।
जस्टिस सिंह ने अपने जीवन से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वह सिर्फ छह महीने के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद उनके पिता के साथ उनकी मौसी स्वर्गीय निर्मला बुच और मौसा स्वर्गीय महेश नीलकंठ बुच ने उन्हें बेटे की तरह पाला। निर्मला बुच मध्य प्रदेश की मुख्य सचिव भी रह चुकी थीं। जस्टिस सिंह ने अपने पालन पोषण और जीवन निर्माण में परिवार की भूमिका को याद करते हुए अपनी बात रखी।
फेयरवेल के दौरान उन्होंने न्याय व्यवस्था में आए बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले अदालतों में मुकदमों की सुनवाई मुख्य रूप से फिजिकल मोड में होती थी लेकिन अब वर्चुअल सुनवाई ने न्यायिक प्रक्रिया को कई स्तर पर आसान बनाया है। तकनीक के इस्तेमाल से अदालतों की कार्यप्रणाली में बदलाव आया है और न्यायिक प्रक्रिया के सामने मौजूद कई व्यावहारिक चुनौतियों को कम करने में मदद मिली है।
कार्यक्रम के दौरान पत्नी इंदिरा का जिक्र करते हुए जस्टिस सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में पत्नी की बातों का सम्मान किया है। अब रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए देहदान करने का उनका संकल्प है और वह इस इच्छा को भी पूरा करेंगे। जैसे ही उन्होंने यह बात कही पूरा कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा।
फेयरवेल कार्यक्रम को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे ने भी संबोधित किया। उन्होंने जस्टिस सिंह के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारियां दी गईं उन्होंने उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाया। जस्टिस सिंह ने हाईकोर्ट के जज के रूप में करीब तीन साल काम किया और इस दौरान कुल 8788 मुकदमों का निपटारा किया।
चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि किसी जज के काम का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि उन्होंने कितने मामलों का निपटारा किया बल्कि उनके फैसलों की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। इस तरह जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की विदाई उनके न्यायिक कार्यकाल के आंकड़ों के साथ समाजसेवा और देहदान के संकल्प के लिए भी याद की जाएगी।
