September 17, 2026

यूपी में भाजपा की कमजोर सीटों पर सहयोगियों की नजर, लगातार हार वाली सीटों पर बढ़ाई सक्रियता

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मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के सहयोगी दल उन सीटों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जहां भाजपा लंबे समय से जीत के लिए संघर्ष करती रही है या उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ होने से पहले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने ऐसे क्षेत्रों में सम्मेलन और दूसरे कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। मुरादाबाद समेत मंडल की उन सीटों पर भी सहयोगी दलों की नजर है, जहां भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा है या जीत का अंतर बेहद कम रहा है।

मुरादाबाद में भाजपा का रिकॉर्ड कमजोर
मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों में 2022 के चुनाव में भाजपा को केवल मुरादाबाद नगर सीट पर जीत मिली थी। इससे पहले 2017 में पार्टी मुरादाबाद नगर और कांठ सीट जीतने में कामयाब रही थी। 2012 के चुनाव में भाजपा के खाते में सिर्फ ठाकुरद्वारा सीट आई थी।

उपचुनावों को अलग रखकर देखें तो मुरादाबाद देहात और बिलारी ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा को इन तीन विधानसभा चुनावों में जीत नहीं मिली। वहीं 2014 में हुए उपचुनाव के बाद ठाकुरद्वारा सीट भी भाजपा के हाथ से निकल गई।

सहयोगी दलों ने शुरू की चुनावी तैयारियां
उत्तर प्रदेश में एनडीए गठबंधन में राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी प्रमुख सहयोगी दल हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) केंद्र में भाजपा की सहयोगी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये दल सीटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में सक्रिय हो गए हैं।

मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।
मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।

भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने कहा, “सहयोगी दलों की सक्रियता बढ़ी है। इसमें कुछ दल सीटों पर दावेदारी भी कर रहे हैं। सीटों का बंटवारा भाजपा और सहयोगी दलों के राष्ट्रीय स्तर के नेता मिलकर तय करेंगे। फिलहाल सभी सीटों पर पार्टी की तैयारी है।”

मुरादाबाद में सहयोगी दलों के कार्यक्रम
13 सितंबर: मुरादाबाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का सम्मेलन।
8 सितंबर: मुरादाबाद में निषाद पार्टी का मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन।
2 अगस्त: मुरादाबाद में अपना दल (एस) का क्षेत्रीय सम्मेलन।
4 जून: ठाकुरद्वारा में रालोद की विजय संकल्प महारैली।
29 अप्रैल: कैलासा बाईपास पर सुभासपा का अति पिछड़ा सम्मेलन।

इन विधानसभा सीटों पर लंबे समय से भाजपा को जीत का इंतजार
विधानसभा सीट – भाजपा की आखिरी जीत
मुरादाबाद देहात – 1993
बिलारी – जीत ही नहीं मिली
ठाकुरद्वारा – 2012
कुंदरकी – 1993

मंडल की इन सीटों पर भी भाजपा को संघर्ष
मुरादाबाद के अलावा मंडल के दूसरे जिलों में भी भाजपा को कुछ विधानसभा सीटों पर लंबे समय से जीत का इंतजार है। इनमें अमरोहा, संभल, नगीना, नजीबाबाद और रामपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। अमरोहा में भाजपा को आखिरी बार 1996 में जीत मिली थी, जबकि संभल में 1993, नगीना में 1991 और नजीबाबाद में 1991 में पार्टी विजयी रही थी। रामपुर विधानसभा सीट पर 2022 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी।

रामपुर में स्थापना दिवस पर अपना दल (एस) का बड़ा कार्यक्रम
अपना दल (एस) ने भी रामपुर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर ली है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संजीव यादव के मुताबिक, 4 नवंबर को पार्टी का स्थापना दिवस है। इस मौके पर रामपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल शामिल होंगी।

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