उदय प्रताप सिंह के खिलाफ तिरंगा अपमान का मामला खारिज कोर्ट ने कहा मंत्री के निर्देश का प्रमाण नहीं
यह मामला 11 अगस्त 2024 को नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में निकाली गई तिरंगा यात्रा से जुड़ा है। गोटेगांव निवासी कौशल सिलावट ने इस संबंध में अदालत में परिवाद दायर किया था। परिवादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि तिरंगा यात्रा के दौरान मंत्री एक खुली जीप में सवार थे और वाहन के बोनट पर राष्ट्रीय ध्वज लगाया गया था। आरोप था कि झंडा इस तरह लगा हुआ था कि वह मंत्री के पैरों को स्पर्श कर रहा था।
परिवादी ने इस घटना को राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 के प्रावधानों से जोड़ते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। मामले में यह तर्क भी रखा गया था कि वाहन के बोनट या किसी अन्य हिस्से पर राष्ट्रीय ध्वज को इस तरह रखना जिससे उसकी गरिमा प्रभावित हो कानून के प्रावधानों के विपरीत है। मार्च 2026 में इसी परिवाद पर एमपी-एमएलए कोर्ट ने मंत्री को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। उस समय अदालत में यह सवाल भी उठा था कि मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश क्यों न दिया जाए।
परिवादी पक्ष ने अदालत में घटना से संबंधित तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों को साक्ष्य के तौर पर पेश किया था। उनका कहना था कि घटना की शिकायत पहले गाडरवारा थाने में की गई लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक को भी लिखित शिकायतें भेजे जाने का दावा किया गया था। परिवादी ने इसी आधार पर अदालत का रुख किया था। इन दावों का उल्लेख पहले की सुनवाई से जुड़ी रिपोर्टों में भी किया गया था।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा की। रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने पाया कि पेश की गई तस्वीर में वाहन का नंबर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। साथ ही यह स्थापित करने वाला पर्याप्त प्रमाण भी सामने नहीं आया कि जिस वाहन पर तिरंगा लगाया गया था वह सरकारी वाहन या मंत्री का निजी वाहन था। इसके अलावा यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि राष्ट्रीय ध्वज को मंत्री के निर्देश पर वाहन पर लगाया गया था।
इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए अदालत ने परिवाद को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया और उसे खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह है कि इस परिवाद के आधार पर मंत्री के खिलाफ आगे की आपराधिक कार्रवाई का रास्ता इस स्तर पर बंद हो गया है।
इस मामले की शुरुआत में अदालत की ओर से जारी नोटिस और अब परिवाद खारिज किए जाने के बीच कई महीनों तक सुनवाई चली। मार्च में सामने आई रिपोर्टों में मंत्री से जवाब मांगे जाने की जानकारी थी जबकि अब उपलब्ध रिपोर्ट में अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने की बात सामने आई है।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद राव उदय प्रताप सिंह को इस परिवाद में राहत मिली है। मामले में लगाए गए आरोपों और परिवादी की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों पर अदालत ने पर्याप्त आधार नहीं पाया और इसी वजह से आगे की कार्रवाई के लिए परिवाद को स्वीकार नहीं किया।
