नेहा पच्चीसिया मामले में एमपी हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, एफआईआर चुनौती याचिका पर अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
नेहा पच्चीसिया के खिलाफ कटनी के कुठला थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह प्रकरण जमीन के सौदे और पद के कथित दुरुपयोग से जुड़े आरोपों को लेकर है। मामले में नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी भी आरोपी बनाए गए हैं। क्षितिज राज बारापात्रे को मामले में मुख्य फाइनेंसर और मारूफ अहमद हनफी को कागजी खरीदार बताया गया है।
हाई कोर्ट में दाखिल याचिका के जरिए नेहा पच्चीसिया ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है। उनकी ओर से आरोपों को गलत बताते हुए कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं, सरकार की ओर से अदालत में दलील दी गई कि नेहा पच्चीसिया फिलहाल फरार हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी है।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पर्याप्त भ्रष्टाचार संबंधी साक्ष्य होने का दावा किया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली और फैसला सुरक्षित रख लिया। अब इस मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है।
इस मामले से पहले नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत याचिका भी जिला अदालत में खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने गिरफ्तारी और आगे की कानूनी कार्रवाई से राहत पाने के लिए हाई कोर्ट का रुख किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद से नेहा पच्चीसिया के साथ क्षितिज राज बारापात्रे और मारूफ अहमद हनफी के भी फरार होने की जानकारी दी गई है।
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक आरोपी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। एफआईआर दर्ज होने के बाद से तीनों के मोबाइल फोन बंद बताए जा रहे हैं। उनकी तलाश के लिए एसआईटी, पुलिस की अलग-अलग टीमें और साइबर सेल संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
नेहा पच्चीसिया का पुलिस सेवा में आने का सफर भी चर्चा में रहा है। उन्होंने मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 20वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में प्रवेश किया था और बाद में कटनी में CSP के पद पर पदस्थ रहीं। वर्तमान मामले के सामने आने के बाद वह निलंबित हैं और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की वैधता को लेकर हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई चल रही है।
मामले में आगे की दिशा अब हाई कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगी। अदालत ने बुधवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा है। इस बीच पुलिस की ओर से फरार आरोपियों की तलाश और मामले से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया जारी है। एफआईआर में लगाए गए आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत की प्रक्रिया और जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगी।
