गंगा स्नान के दो वायरल वीडियो में दिखी समान गतिविधियां, महिला के अलग रूप से AI छेड़छाड़ का शक गहराया
वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों में महिला के बाद एक युवक गंगा में स्नान करने के लिए जाता दिखाई देता है। इसके बाद एक बुजुर्ग व्यक्ति भी गंगा की ओर जाता नजर आता है। घटनाओं और गतिविधियों का यह क्रम दोनों वीडियो में काफी हद तक एक जैसा दिखाई देता है। महिला के दृश्य में अंतर होने के कारण अब वीडियो के साथ डिजिटल छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है।
पहले वीडियो में महिला गंगा में स्नान करती और डुबकी लगाती दिखाई देती है। इसी दौरान एक युवक भी गंगा स्नान के लिए आगे बढ़ता है। उसके बाद बुजुर्ग व्यक्ति को भी गंगा की ओर जाते हुए दिखाया गया है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अलग-अलग दावों के साथ साझा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया था, इसे किस स्थान पर बनाया गया और इसमें दिखाई दे रहे लोगों की पहचान क्या है, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बाद सामने आए दूसरे वीडियो में महिला पूरे कपड़ों में सलवार सूट पहने हुए दिखाई देती है। इस वीडियो में भी महिला के स्नान के बाद युवक और बुजुर्ग के गंगा की ओर जाने की गतिविधियां पहले वीडियो से मिलती-जुलती नजर आती हैं। यही समानता दोनों वीडियो की सत्यता को लेकर चर्चा का प्रमुख कारण बनी हुई है।
दोनों वीडियो में महिला के दृश्य में अंतर और बाकी गतिविधियों की समानता को देखते हुए इनके AI की मदद से तैयार किए जाने या डिजिटल तरीके से बदले जाने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि वीडियो वास्तव में AI से बनाए गए हैं या इनमें किसी तरह की तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। इसलिए फिलहाल इसे केवल आशंका के तौर पर ही देखा जा रहा है।
वीडियो के वायरल होने के बाद श्रीगंगा सभा की ओर से भी चिंता व्यक्त की गई है। संस्था के अध्यक्ष और उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री नितिन गौतम ने कहा कि उन्होंने भी सोशल मीडिया पर ये वीडियो देखे हैं। उनका कहना है कि यदि AI के जरिए महिलाओं के चित्र या वीडियो को इस तरह गंगा के बीच दिखाया जा रहा है तो यह निंदनीय है।
नितिन गौतम ने ऐसे वीडियो को तीर्थ और महिलाओं को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए शासन-प्रशासन से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के तहत भी मामला दर्ज किए जाने की मांग रखी।
उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के कारण इस तरह की सामग्री तैयार करना आसान हो गया है और फिर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया जा सकता है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में कार्रवाई जरूरी है।
फिलहाल दोनों वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इनके रिकॉर्ड होने की तारीख, वास्तविक स्थान और वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान भी स्पष्ट नहीं है। इसलिए सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को सत्य मानने से पहले आधिकारिक या तकनीकी जांच का इंतजार करना जरूरी है। वीडियो में दिखाई देने वाली समान गतिविधियां AI से छेड़छाड़ की आशंका जरूर पैदा करती हैं, लेकिन इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
