भारत में भी दिखने लगा अल नीनो का असर…. जेब पर पड़ रहा भारी, चीनी के कई चीजें हुई महंगी
नई दिल्ली। अल नीनो (El Niño) ने दस्तक दे दी है। अब भारत (India) में भी इसका असर दिखने लगा है। यहां अल नीनो ने मौसम को बुरी तरह प्रभावित किया है। मौसम ने फसलों पर असर डाला और फसलें अब आपकी जेब पर असर डाल रही हैं। चीनी (Sugar) के बाद अंडे और चिकन के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक जिस तरह गन्ने का उत्पादन गिरा है, अगर उसी तरह मक्के का उत्पादन भी घटा तो इन चीजों के दाम और बढ़ सकते हैं। चावल और सोयाबीन जैसी फसलें भी संकट के केंद्र में हैं।
गौरतलब है कि अल नीनो की स्थिति में मानसून कमजोर और अनियमित रहता है। साथ ही ज्यादा गर्मी रहने से मिट्टी में नमी कम हो जाती है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार घट सकती है। इस बार मौसम विज्ञानियों ने सदी के सबसे ताकतवर अल नीनो की दस्तक की चेतावनी दी है। भारत में इसका असर दिखना शुरू हो गया है और साल के अंत तक इसके पीक पर पहुंचने की संभावना है।
चीनी हुई कड़वी
हाल ही में चीनी की कीमतें सालाना आधार पर 40 प्रतिशत बढ़ गई हैं। इसकी वजह पिछले साल ज्यादा बारिश और फफूंद के कारण गन्ने की पैदावार घटना है। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण और निर्यात के कारण भी चीनी के दाम बढ़े हैं। त्योहार सीजन से पहले चीनी 49 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 65 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि अब दाम स्थिर हैं।
मक्का बिगाड़ेगा बजट
इस साल मक्का उत्पादन भी कम होने के आसार नजर आ रहे हैं। इसके दाम में पहले ही करीब तीस फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसका असर बाजार पर दिख रहा है। अगर पैदावार कम हुई तो पशु आहार और महंगा होगा। इसके महंगा होने से मुर्गी पालन की लागत बढ़ेगी, जिसका असर अंडे और चिकन के दाम पर पड़ेगा। बारिश की कमी से 2026-27 में गन्ना उत्पादन कम रह सकता है। चीनी की मांग को देखते हुए अगले सीजन में गन्ने से एथेनॉल उत्पादन कम किया जाएगा। ऐसे में एथेनॉल मक्के से बनेगा। मगर इस साल मक्का उत्पादन भी कम रहने की आशंका है। ऐसे में इसके दाम बढ़ेंगे।
पशु आहार भी महंगा
भारत में 2025 में पोल्ट्री उद्योग 2.6 लाख करोड़ रुपये का था। मक्का, सोयाबीन खली महंगे होने से पोल्ट्री की लागत बढ़ेगी, क्योंकि ये प्रमुख पशु-मुर्गी आहार हैं। दरअसल देश में 25 फीसदी एथेनॉल गन्ने से बनता है, बाकी अनाज खासकर मक्का से बनाया जाता है। बीती एक अप्रैल से ई-20 पेट्रोल की बिक्री अनिवार्य हुई। इससे चीनी उत्पादन घटने के बावजूद 2025-26 में 30 लाख टन से ज्यादा गन्ने से एथेनॉल बनाया गया।
