टीएमसी के 17 सांसद भाजपा में जा सकते हैं, यूसुफ पठान समेत तीन ने NDA को बाहर से समर्थन देने का किया ऐलान
बसुनिया के अनुसार, 17 सांसद भाजपा में जाने की तैयारी कर रहे हैं और इस संबंध में प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा चुका है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दल बदल की प्रक्रिया दुर्गा पूजा के बाद हो सकती है। इससे पहले टीएमसी के 20 सांसद अलग होकर NCPI में शामिल हुए थे और उन्होंने NDA को समर्थन देने की घोषणा की थी।
बागी गुट में शामिल अबू ताहेर खान ने बसुनिया के दावे पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि बसुनिया को पूरे गुट की ओर से बयान देने का अधिकार नहीं है। खान ने स्पष्ट किया कि वे भाजपा में नहीं जाएंगे और न ही NDA में शामिल होंगे। उन्होंने जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान और बहरामपुर के सांसद यूसुफ पठान का भी नाम लिया। उनके मुताबिक तीनों सांसद NDA को बाहर से समर्थन देंगे, लेकिन भाजपा या NDA का हिस्सा नहीं बनेंगे।
अबू ताहेर खान ने यह भी स्पष्ट किया कि यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और उनके जैसे नेता भाजपा या NDA की बैठकों में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से विकास से जुड़े मुद्दों पर बुलाई जाने वाली बैठकों में शामिल होने पर उन्होंने सहमति जताई है।
सायोनी घोष को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। बसुनिया ने 17 सांसदों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में यह तय नहीं है कि घोष उन सांसदों में शामिल हैं या नहीं। कुल 20 सांसदों के टीएमसी से अलग होने की बात सामने आई है, जिनमें से तीन ने भाजपा में शामिल नहीं होने और NDA को बाहर से समर्थन देने की बात कही है। इसलिए बाकी सांसदों को लेकर अलग-अलग दावे और अटकलें जारी हैं।
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल में कोलकाता नगर निगम और हावड़ा नगर निगम समेत स्थानीय चुनावों की तैयारियां चल रही हैं। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह इन चुनावों में अपने दम पर मैदान में उतरेगी। पार्टी के सत्ता में आने के बाद राज्य में पहली बार होने वाले इन चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ी हुई हैं।
भाजपा की ओर से भी फिलहाल बागी सांसदों को पार्टी में शामिल करने की किसी तत्काल योजना से इनकार किया गया है। पार्टी प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार टीएमसी या NCPI से कोई भी व्यक्ति भाजपा में शामिल नहीं हो रहा है। उन्होंने टीएमसी शासन के दौरान इन नेताओं और सांसदों की भूमिका पर भी सवाल उठाया।
इसी बीच आगामी नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के उपचुनाव को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। टीएमसी में सांसदों के अलावा विधायक स्तर पर भी टूट की चर्चा है। ऋताब्रत बनर्जी गुट के साथ 60 से अधिक विधायकों के होने का दावा किया जा रहा है। पार्टी ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान डे और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में सांसदों के संभावित दल बदल को लेकर चल रही अटकलों के बीच आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
