September 11, 2026

दांत में फिलिंग कराने के बाद भी क्यों लौट आती है कैविटी, जानिए दोबारा सड़न होने के प्रमुख कारण और बचाव के तरीके

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नई दिल्ली । दांत में कैविटी होने पर खराब हिस्से को साफ करके फिलिंग करना सामान्य उपचार है। इससे दांत की क्षतिग्रस्त संरचना को बचाने में मदद मिलती है, लेकिन फिलिंग हो जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में उसी दांत में दोबारा सड़न नहीं हो सकती। कुछ लोगों में समय बीतने के बाद फिलिंग के आसपास फिर से कैविटी विकसित हो जाती है।

फिलिंग के बाद दोबारा होने वाली सड़न को सेकेंडरी कैरीज या रिकरेंट कैरीज कहा जाता है। इसके पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं। व्यक्ति का कैविटी का जोखिम, मुंह में बनने वाला प्लाक, दांतों की सफाई, मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन और फिलिंग की स्थिति इसमें भूमिका निभा सकती है।

यदि मुंह में प्लाक ज्यादा बनता है या ओरल हाइजीन ठीक नहीं रहती, तो फिलिंग के बाद भी दांतों में सड़न का खतरा बना रह सकता है। इसी तरह बार-बार मीठे खाद्य पदार्थ या पेय लेने और पहले से कई दांतों में कैविटी होने की स्थिति में भी जोखिम कम नहीं होता। इसलिए फिलिंग को कैविटी के खिलाफ स्थायी सुरक्षा नहीं माना जा सकता।

फिलिंग और प्राकृतिक दांत के मिलने वाले हिस्से को रिस्टोरेशन मार्जिन कहा जाता है। यह जगह प्लाक जमा होने के लिए संवेदनशील हो सकती है, खासकर जब वहां सही तरीके से सफाई नहीं हो पाती। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन से मिलने वाली शुगर का इस्तेमाल करके एसिड बनाते हैं। बार-बार होने वाली इस प्रक्रिया से दांतों के मिनरल्स को नुकसान पहुंच सकता है और फिलिंग के किनारे मौजूद इनेमल या डेंटिन में नई कैविटी विकसित हो सकती है।

पुरानी फिलिंग की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। समय के साथ डेंटल फिलिंग में टूट-फूट या दूसरे प्रकार के डिफेक्ट हो सकते हैं। जिन दांतों पर चबाने का दबाव अधिक पड़ता है, वहां फिलिंग के टूटने का जोखिम हो सकता है। अगर फिलिंग का कोई हिस्सा टूट गया हो, किनारा खुला महसूस हो, उस जगह भोजन बार-बार फंसता हो या चबाते समय दर्द होता हो, तो दांत की जांच कराना जरूरी है।

हर खराब फिलिंग को तुरंत पूरी तरह बदलना जरूरी नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में केवल खराब हिस्से की रिपेयर भी की जा सकती है। इसका निर्णय दांत की स्थिति की जांच के बाद किया जाता है।

मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों का सेवन भी कैविटी के जोखिम से जुड़ा है। केवल कुल कितनी चीनी खाई गई, यह ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दिन में कितनी बार दांत शुगर के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है। चॉकलेट, टॉफी, कैंडी, बिस्किट, मीठे स्नैक्स और शुगरी ड्रिंक्स का बार-बार सेवन दांतों पर एसिड अटैक की घटनाएं बढ़ा सकता है। चिपचिपे खाद्य पदार्थ दांतों पर अधिक समय तक रह सकते हैं।

ब्रशिंग की गलत आदतें भी समस्या बढ़ा सकती हैं। बहुत जल्दी ब्रश करना, दांतों की अंदरूनी सतहों और पीछे के दांतों की सफाई छोड़ देना, बहुत अधिक जोर लगाना या फ्लोराइड टूथपेस्ट का सही इस्तेमाल न करना सफाई को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए फिलिंग को कैविटी से स्थायी सुरक्षा कवच नहीं समझना चाहिए। सही तरीके से ब्रशिंग, दांतों की सफाई, शुगर के सेवन को नियंत्रित करना और नियमित डेंटल चेकअप दोबारा कैविटी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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