सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच प्रदर्शन मामलों में कमेटी की शक्तियां तय कीं, कहा- FIR का आदेश देने का अधिकार सिर्फ अदालत को
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। अदालत ने कहा कि कमेटी सीधे FIR दर्ज करने का आदेश नहीं दे सकती और उसे अदालत की निगरानी में काम करना होगा। कार्यवाही के दौरान आने वाली किसी समस्या के समाधान के लिए कमेटी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है।
अदालत ने कमेटी को अपनी सहायता के लिए अमिकस या वकील नियुक्त करने की भी अनुमति दी है। इसके अलावा कमेटी अपनी जांच से संबंधित जानकारी व्यापक स्तर पर सार्वजनिक कर सकती है और लोगों से सुझाव तथा आपत्तियां मांग सकती है। संवेदनशील और जरूरतमंद गवाहों तक पहुंच बनाने के लिए अलग व्यवस्था भी तैयार की जा सकती है।
इसमें हेल्पलाइन जैसी व्यवस्था शामिल हो सकती है, ताकि वे लोग भी अपनी बात कमेटी तक पहुंचा सकें जो सीधे उसके सामने उपस्थित नहीं हो सकते। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया कि कमेटी की पहली बैठक 15 सितंबर को निर्धारित है।
सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर के अपने आदेश का भी उल्लेख किया। अदालत ने उस समय संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शन से जुड़े आपराधिक मामलों को खत्म करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों के संबंध में दर्ज FIR पर आगे कार्रवाई या जांच नहीं की जाएगी और उन्हें बंद माना जाएगा। साथ ही इन घटनाओं के संबंध में नई FIR दर्ज नहीं करने का निर्देश भी दिया गया था।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गठित HPEC को 20 जुलाई के छात्र प्रदर्शन से जुड़े विभिन्न आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी है। कमेटी पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों के साथ सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों की भी जांच करेगी। उसे दस्तावेजी सबूत, लोगों के प्रतिवेदन और गुमनाम शिकायतें लेने की अनुमति है।
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की संरचना बदलने की मांग भी खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि कमेटी का गठन स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने किया है और काम शुरू होने से पहले इसमें बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, किसी पक्ष को कमेटी के कामकाज को लेकर चिंता होने पर वह अदालत के सामने अपनी बात रख सकता है।
सुनवाई के दौरान 14 वर्षीय लड़की को कथित तौर पर धमकाने और परेशान किए जाने का मामला भी सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को संसद मार्ग थाने में दर्ज FIR पर तत्काल कार्रवाई कर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। लड़की फिलहाल उत्तर प्रदेश में रह रही है। अदालत ने उत्तर प्रदेश पुलिस को लड़की और उसके परिवार को पुलिस सुरक्षा तथा जरूरी सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने को भी कहा।
अदालत ने कहा कि यदि किसी बच्चे या उसके परिवार को आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाने के लिए डराया-धमकाया जा रहा है तो HPEC की जांच के नतीजे का इंतजार नहीं किया जा सकता। लड़की के बयान की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी बताते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोप सही पाए जाने पर जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।
सुनवाई में स्वातंत्र भारद्वाज से जुड़े आपराधिक मामलों का भी उल्लेख हुआ। उनके खिलाफ कथित हमले, आपराधिक धमकी और POCSO से जुड़े मामलों का जिक्र किया गया। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कमेटी की संरचना, संवेदनशील गवाहों की पहुंच, अंतरिम मुआवजा, पेलेट गन के इस्तेमाल और प्रदर्शनकारियों के डेटा के कथित संग्रह को लेकर चिंताएं रखीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्ष अपनी सामग्री और सुझाव कमेटी के सामने रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अदालत भी इन मुद्दों को स्पष्ट करेगी।
