भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी से बढ़ी हलचल, शेख हसीना प्रत्यर्पण और चीन से बढ़ती नजदीकी पर नजर
नई दिल्ली । बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आएंगे या नहीं, इसे लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है। भारत में 12-13 सितंबर के बीच ब्रिक्स बैठक होनी है। लगभग सभी देश इसमें शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन बांग्लादेश के शिखर सम्मेलन से दूरी बनाने की अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हो रहा है, जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण और तीस्ता नदी के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है। साथ ही बांग्लादेश में चीन के बढ़ते दखल के भी संकेत मिल रहे हैं। भारत अब तक बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को नई दिल्ली आने का दो बार न्योता दे चुका है।
बुधवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलील-उर-रहमान पत्रकारों से बात कर रहे थे। इस दौरान उनसे पीएम रहमान के ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने को लेकर सवाल पूछा गया। सवाल सुनते ही उन्होंने चुप्पी साध ली और विषय बदलने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि वह वहां अपने देश के प्रतिनिधि के तौर पर नहीं हैं और उनसे महासभा के अध्यक्ष के रूप में ही सवाल किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई द्विपक्षीय मुद्दा है तो वह विदेश मंत्री के तौर पर उस पर अलग से बात कर सकते हैं।
भारत का न्योता
भारत ने रहमान को BIMSTEC शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भी बुलाया है। इसमें भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, बांग्लादेश, म्यांमा, नेपाल और भूटान शामिल हैं। हालांकि, भारत की तरफ से यह भी कहा जा चुका है कि रहमान के आने की अभी कोई पुष्टि नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इसकी जानकारी दी थी।
इससे पहले जब रहमान प्रधानमंत्री बने, तब भारत ने उन्हें नई दिल्ली आने का न्योता दिया था। हालांकि, उस समय भी उनकी यात्रा की पुष्टि नहीं हुई थी और ऐसी खबरें सामने आई थीं कि रहमान चीन जाने की तैयारी कर रहे हैं। वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यात्रा उस समय के लिए टाल दी थी। बाद में वह म्यांमार और बीजिंग पहुंचे थे।
एक ओर बांग्लादेश भारत के सामने अपनी शर्तें रख रहा है, वहीं बैठकों में डीजल सप्लाई बढ़ाने समेत कई तरह की मदद भी मांग रहा है।
किस मूड में है बांग्लादेश
अगस्त में बांग्लादेश ने कहा था कि प्रधानमंत्री को भारत यात्रा की कोई जल्दी नहीं है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा था कि अगर राष्ट्रीय हितों के आधार पर किसी समझौते पर पहुंचा जाता है तो अगले सप्ताह या उसके अगले सप्ताह यात्रा हो सकती है। उन्होंने कहा था कि इसे लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। इससे पहले भी बांग्लादेश ने कहा था कि रहमान की यात्रा के लिए भारत को अनुकूल माहौल बनाना होगा।
क्या शेख हसीना हैं वजह
साल 2024 में हुए छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। बाद में जब 2026 में रहमान सरकार ढाका में आई, तो उनके प्रत्यर्पण की मांग तेज हो गई। हाल ही में एक और मंत्री जाहिद उर रहमान ने कहा है कि हसीना को भारत से लेकर आएंगे और उन्हें फांसी दे दी जाएगी। हालांकि, इससे पहले बांग्लादेश सरकार ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री को सभी कानूनी सहायता और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
प्रत्यर्पण के मुद्दे पर पहले से तनावपूर्ण रिश्ते तब और खराब हुए, जब हसीना ने भारत में रहते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की। बांग्लादेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही इस पर आपत्ति जताई थी और बाद में अपना रुख और सख्त कर लिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है।
क्या चीन है कारण
जून में तारिक रहमान चीन की यात्रा पर पहुंचे थे और इस दौरान बांग्लादेश की ओर से बीजिंग से निवेश मांगने की खबरें सामने आई थीं। यात्रा के दौरान कई द्विपक्षीय समझौते भी हुए थे। बांग्लादेश ने बीजिंग से तीस्ता नदी के मुद्दे पर मदद मांगी थी। इसके अलावा मोंगला पोर्ट पर SEZ यानी स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाए जाने से जुड़ी डील भी चर्चा में रही थी। ढाका के इन कदमों को भारत बारीकी से देख रहा था।
