दूसरे के दस्तावेज पर सिम एक्टिवेट कर थमा दी किसी और को: शिवपुरी में ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत पुलिस की बड़ी कार्रवाई
भौंती थाना पुलिस के सामने साइबर पोर्टल के जरिए ऑनलाइन ठगी की शिकायत पहुंची थी। राजस्थान के डीडवाना कुचामन सिटी निवासी किशनलाल ने शिकायत में बताया कि उन्हें दो मोबाइल नंबरों से फोन आया था। कॉल करने वाले लोगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और एफआईआर दर्ज होने का डर दिखाकर उन्हें अपने जाल में फंसा लिया। आरोपियों ने कार्रवाई का डर दिखाते हुए किशनलाल से 12520 रुपए फीनो पेमेंट्स बैंक के खाते में ट्रांसफर करा लिए। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर पुलिस ने ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि 7067915249 और 6267266154 नंबर ग्राम महोबा डामरौन निवासी राहुल जाटव और भानुप्रताप जाटव के नाम पर दर्ज थे। इसके बाद भौंती पुलिस ने दोनों के खिलाफ धारा 318(4) और 319(2) बीएनएस के साथ 66(D) आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन नंबरों का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इनके जरिए साइबर ठगी के नेटवर्क से कौन कौन लोग जुड़े हुए हैं।
इसी अभियान के तहत मायापुर पुलिस ने सिम जारी करने वाले एजेंट के खिलाफ भी कार्रवाई की है। पुलिस को मिली एक एक्सेल शीट की जांच के दौरान POS कोड 8085309715 से जारी एक सिम साइबर फ्रॉड से जुड़ी मिली। जांच में सिम नंबर 7898219481 रेखा पत्नी हल्के आदिवासी निवासी ग्राम पड़ोरा के नाम पर दर्ज पाया गया। पुलिस ने जब रेखा से पूछताछ की तो उन्होंने बताया कि उन्होंने यह सिम कभी खरीदी ही नहीं थी। परिवार के किसी सदस्य द्वारा भी इस सिम का इस्तेमाल किए जाने से उन्होंने इनकार किया।
इसके बाद पुलिस ने सिम जारी करने की प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया कि मायापुर स्थित एयरटेल स्टोर के एजेंट पवन कुमार लोधी ने ग्राहक के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर उसके नाम से सिम एक्टिवेट की और उसे किसी दूसरे व्यक्ति को दे दिया। बाद में इसी सिम का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया। पुलिस की जांच में इस नंबर से कुल 13040 रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है।
मायापुर पुलिस ने पवन कुमार लोधी के खिलाफ धारा 318(4) बीएनएस के साथ 66(C) आईटी एक्ट और दूरसंचार अधिनियम 2023 की धारा 42(3)(E) और 42(6) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस अब पूरे मामले की विवेचना कर रही है। इस कार्रवाई से साफ है कि साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस केवल ठगी करने वालों पर ही नहीं बल्कि संदिग्ध सिम उपलब्ध कराने वाले लोगों पर भी नजर रख रही है। ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत फर्जी सिम के नेटवर्क पर की जा रही यह कार्रवाई साइबर ठगी पर लगाम लगाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
