September 5, 2026

मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं

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नई दिल्ली । सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने के संकेत नहीं दे रही है। पिछले चार वर्षों में जिस रफ्तार से सोने की कीमतों ने ऊंचाई हासिल की है उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2022 में करीब 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहने वाला 24 कैरेट सोना अब सितंबर 2026 में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी चार साल में सोने ने करीब 210 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जरूर देखने को मिली है लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे तेजी के दौर का अंत नहीं बल्कि लंबे बुल रन के बीच सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 29 जनवरी को 5608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और फिलहाल सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4400 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर बना रहता है तब तक सोने की तेजी को मजबूत समर्थन मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में भी करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आती है तो दीपावली तक सोने का भाव 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती खरीदारी है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसे डी डॉलराइजेशन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई देशों को अब यह चिंता है कि विदेशी मुद्रा या दूसरे देशों के वित्तीय साधनों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है जबकि अपने पास रखा सोना अधिक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। यही वजह है कि चीन जैसे देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं और अन्य केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

सोने की मजबूती की दूसरी बड़ी वजह इसकी मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में बढ़ती अहमियत है। पहले सोने को मुख्य रूप से महंगाई और आर्थिक संकट से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसे करेंसी के अवमूल्यन और वित्तीय जोखिमों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों और देशों दोनों के लिए सोना भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है।

इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बढ़ने वाली भौतिक मांग भी कीमतों को मजबूत आधार दे रही है। आपूर्ति की सीमित स्थिति और संस्थागत खरीदारी के कारण सोने पर दबाव कम दिखाई दे रहा है। हालांकि कीमतों में बीच बीच में गिरावट संभव है लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

खरीदारी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने वालों को बहुत बड़ी गिरावट का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कीमत 1.45 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में नीचे आती है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जरूरत और बजट के हिसाब से 40 से 50 फीसदी खरीदारी पहले की जा सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक बाजार और रुपये की चाल से प्रभावित होती हैं इसलिए तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेश से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।

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