September 3, 2026

एंटीबायोटिक बेअसर तो जान पर भारी संक्रमण! 1.59 लाख मरीजों पर ICMR की रिसर्च में सामने आया गंभीर खतरा

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नई दिल्ली। एंटीबायोटिक दवाएं गंभीर बैक्टीरियल इंफेक्शन के इलाज में बेहद अहम मानी जाती हैं लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं तो इलाज की चुनौती काफी बढ़ जाती है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी ICMR से जुड़े शोधकर्ताओं की बड़ी स्टडी में सामने आया है कि कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंस रखने वाले ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मौत का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे संक्रमण न केवल मरीज की हालत को गंभीर बना सकते हैं बल्कि इलाज की अवधि और दवाओं पर होने वाले खर्च को भी बढ़ा सकते हैं।

ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया शरीर के अलग अलग हिस्सों में संक्रमण फैला सकते हैं। इनमें ई कोलाई क्लेबसिएला न्यूमोनिया एसिनेटोबैक्टर बाउमानी और स्यूडोमोनास एरुजिनोसा जैसे बैक्टीरिया शामिल हैं। ये फेफड़ों पेशाब की नली घाव और खून में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। गंभीर संक्रमण के मामलों में कार्बापेनेम जैसी शक्तिशाली एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन जब बैक्टीरिया इन दवाओं के खिलाफ भी रेजिस्टेंट हो जाते हैं तो डॉक्टरों के पास प्रभावी उपचार के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने अप्रैल 2022 से अप्रैल 2025 के बीच देश के 20 बड़े अस्पतालों में भर्ती 1 लाख 59 हजार 336 मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें 26 हजार 213 मरीजों में ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रमण की पुष्टि हुई। इनमें 16 हजार 25 मरीज यानी करीब 61.1 प्रतिशत ऐसे थे जिनमें संक्रमण कार्बापेनेम एंटीबायोटिक्स के खिलाफ रेजिस्टेंट पाया गया। इस अंतर ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर गंभीर चिंता सामने रखी है।

स्टडी के आंकड़ों में मौत का अंतर भी स्पष्ट नजर आया। ई कोलाई से संक्रमित मरीजों में कार्बापेनेम रेजिस्टेंट संक्रमण की स्थिति में मृत्यु दर 24.4 प्रतिशत रही जबकि दवा के प्रति संवेदनशील संक्रमण में यह 17.3 प्रतिशत थी। क्लेबसिएला न्यूमोनिया के मामले में मृत्यु दर क्रमशः 31.2 और 23.5 प्रतिशत रही। एसिनेटोबैक्टर बाउमानी में यह आंकड़ा 37.9 और 32.8 प्रतिशत जबकि स्यूडोमोनास एरुजिनोसा में 28.9 और 20.2 प्रतिशत रहा।

खतरा तब और बढ़ जाता है जब संक्रमण खून तक पहुंच जाता है। ऐसे मामलों में रेजिस्टेंट बैक्टीरिया से संक्रमित मरीजों में मृत्यु दर कई मामलों में काफी अधिक देखी गई। शोध के मुताबिक इन चारों बैक्टीरिया से होने वाले रक्त संक्रमणों में 85 प्रतिशत से ज्यादा मामले अस्पताल से जुड़े संक्रमण थे। इससे अस्पतालों में साफ सफाई संक्रमण नियंत्रण और मेडिकल उपकरणों के सुरक्षित इस्तेमाल की अहमियत सामने आती है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का असर मरीज की जेब पर भी पड़ सकता है। रिसर्च में रेजिस्टेंट संक्रमण के इलाज में एंटीबायोटिक दवाओं का खर्च सामान्य संक्रमण की तुलना में लगभग 1.1 से 2 गुना तक ज्यादा पाया गया। हालांकि इसमें अस्पताल में भर्ती रहने कमरे जांच और अन्य चिकित्सा सेवाओं का खर्च शामिल नहीं था इसलिए वास्तविक आर्थिक बोझ इससे अधिक हो सकता है।

विशेषज्ञों के लिए यह रिसर्च इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस केवल इलाज की समस्या नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेना दवाओं का गलत इस्तेमाल और संक्रमण नियंत्रण में लापरवाही बैक्टीरिया में प्रतिरोध बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक लेने से बचना सही जांच के बाद उचित दवा का इस्तेमाल करना और अस्पतालों में संक्रमण रोकने के उपायों को मजबूत करना बेहद जरूरी है।

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