August 31, 2026

भोपाल में यतीमखाने की 2.7 एकड़ जमीन पर नया बवाल, FIR के बाद अस्पताल पर ताला और पानी रोकने का आरोप, 98 बच्चों पर संकट

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भोपाल । भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित दारुल शफकत यतीमखाने की करीब 2.7 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से संपत्ति को वक्फ की जमीन बताते हुए दारुल शफकत सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष शाहिद अलीम खान समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज कराए जाने के बाद अब जीवन रेखा अस्पताल पर यतीमखाने के एक हिस्से में ताला लगाने और पानी की व्यवस्था प्रभावित करने के आरोप लगे हैं। सोसायटी का दावा है कि ताला लगाए जाने के बाद पानी की मोटर और स्टोरेज टैंक तक पहुंच बंद हो गई है। इससे यतीमखाने में रह रहे करीब 98 बच्चों के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है और फिलहाल टैंकर के जरिए पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है।

वक्फ बोर्ड के अनुसार विवादित संपत्ति वक्फ इदारा यतीम खाना शाहजहानी के नाम पर दर्ज है और करीब 2.7 एकड़ क्षेत्र में फैली है। बोर्ड का कहना है कि यह संपत्ति वर्ष 1961 में गजट नोटिफाइड वक्फ संपत्ति बनी थी और अब UMEED पोर्टल पर भी दर्ज है। वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल का आरोप है कि दारुल शफकत सोसायटी ने संपत्ति के एक हिस्से पर निर्माण कराकर उसे जीवन रेखा अस्पताल को किराए पर दिया। बोर्ड के मुताबिक भवन निर्माण की अनुमति लेते समय सोसायटी के पदाधिकारियों ने खुद को जमीन का मालिक बताया जबकि बोर्ड के रिकॉर्ड में जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है।

मामले में आर्थिक लेनदेन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वक्फ बोर्ड का कहना है कि जुलाई 2011 से मई 2025 के बीच अस्पताल से करीब 1 करोड़ 96 लाख रुपए किराए और 30 लाख रुपए सिक्योरिटी डिपॉजिट के तौर पर प्राप्त हुए। यानी कुल करीब 2.26 करोड़ रुपए की राशि सामने आती है। बोर्ड का आरोप है कि इस आय का पूरा हिसाब उसे नहीं दिया गया। बोर्ड ने मामले में करीब 28 करोड़ 91 लाख रुपए की आरआरसी जारी किए जाने की बात भी कही है। हालांकि दारुल शफकत सोसायटी इन आरोपों को खारिज करती है और उसका कहना है कि किराए की रकम संस्था के बैंक खाते में जमा होती रही है तथा उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है।

इसी विवाद के बीच सोसायटी ने जीवन रेखा अस्पताल प्रबंधन पर रात के समय यतीमखाने के एक हिस्से में ताला लगाने का आरोप लगाया है। सोसायटी के कार्यकारिणी सदस्य परवेज खान के अनुसार इसी हिस्से में सिलाई सेंटर और बैठक के लिए स्थान था। आरोप है कि वहां रखा सामान बाहर निकाल दिया गया और अस्पताल का सामान अंदर रखकर दोबारा ताला लगा दिया गया। सोसायटी का कहना है कि इस पूरी घटना के CCTV फुटेज भी उसके पास मौजूद हैं।

सबसे बड़ी चिंता पानी की व्यवस्था को लेकर सामने आई है। सोसायटी के मुताबिक जिस हिस्से में ताला लगाया गया है वहीं पानी का टैंक मोटर और पानी भरने के स्विच मौजूद हैं। मुख्य यतीमखाने से जुड़े रास्ते पर भी ताला लगाए जाने का आरोप है। सोसायटी का कहना है कि अब बच्चों की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए टैंकर बुलाना पड़ रहा है। संस्था के अनुसार अलग-अलग केंद्रों में करीब 98 बच्चे रहते हैं जिनमें 65 लड़के और 33 लड़कियां शामिल हैं। बच्चों के रहने भोजन और शिक्षा की व्यवस्था संस्था द्वारा किए जाने का दावा है।

विवादित परिसर में गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए सिलाई कढ़ाई प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित होने की बात कही गई है। सोसायटी का आरोप है कि ताला लगने से महिलाओं का सामान बाहर हो गया और प्रशिक्षण तथा काम प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर सोसायटी का कहना है कि अस्पताल को वर्ष 2011 में रजिस्टर्ड किरायानामे के जरिए परिसर का हिस्सा दिया गया था और वर्ष 2016 में समझौते को आगे बढ़ाया गया जिसकी अवधि 2026 तक बताई गई है।

मालिकाना हक को लेकर मामला हाईकोर्ट में भी लंबित बताया जा रहा है। सोसायटी का दावा है कि 2024 से मामले की सुनवाई चल रही है और यथास्थिति बनाए रखने का आदेश है। वहीं वक्फ बोर्ड संपत्ति को अपनी बताते हुए सोसायटी पर गलत तरीके से स्वामित्व जताने का आरोप लगा रहा है। ऐसे में अब विवाद जमीन के मालिकाना हक से आगे बढ़कर अस्पताल के कब्जे पानी की व्यवस्था और बच्चों की सुविधाओं तक पहुंच गया है। दोनों पक्ष अपने अपने दस्तावेज और दावों के आधार पर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि विवाद का समाधान कब होगा और तब तक यतीमखाने में रह रहे बच्चों की मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

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