बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट में 31 सीटों का मुद्दा उठा, हटाए गए वोट और जीत के अंतर पर मांगा गया विस्तृत डेटा
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 31 सीटों पर जीत का अंतर और हटाए गए मतदाताओं की संख्या के बीच महत्वपूर्ण अंतर है। इसी संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया कि क्या ऐसी स्थिति में अदालत नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दे सकती है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी पश्चिम बंगाल में दोबारा विधानसभा चुनाव कराने का कोई आदेश नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित पक्ष को इस मुद्दे पर औपचारिक आवेदन दाखिल करने को कहा है। साथ ही चुनाव आयोग से SIR से जुड़ी अपीलों का विस्तृत और श्रेणीवार आंकड़ा पेश करने को कहा गया है।
सुनवाई में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में SIR से संबंधित करीब 38.1 लाख अपीलें दाखिल हुई हैं। इनमें लगभग 7 लाख अपीलें ऐसे लोगों से जुड़ी हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे। दूसरी ओर करीब 31 लाख अपीलें मतदाता सूची में लोगों के नाम शामिल किए जाने पर आपत्ति से संबंधित बताई गई हैं।
सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा उन अपीलों का है जिन पर अब तक फैसला हो चुका है। अदालत को बताया गया कि करीब 83 हजार अपीलों का निपटारा हुआ है। इनमें 75,443 मामलों में मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए गए। इसका अर्थ है कि निपटाए गए मामलों में 90 प्रतिशत से अधिक मामलों में बाहर किए गए मतदाताओं को राहत मिली।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर पहले से राजनीतिक और कानूनी विवाद चल रहा है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि 90 प्रतिशत का आंकड़ा पूरे SIR के तहत हटाए गए मतदाताओं पर लागू नहीं होता। यह केवल अब तक निपटाई गई उन अपीलों से संबंधित है, जिनमें नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई थी।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान चुनाव परिणाम और मतदाता सूची के बीच संभावित संबंध को समझाने के लिए एक उदाहरण रखा। उन्होंने कहा कि यदि किसी सीट पर जीत का अंतर 50 वोट हो और 100 मतदाताओं के नाम हटाए गए हों, तो बाद में इनमें से बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना गलत पाए जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से लंबित और निपटाई गई अपीलों का विस्तृत विवरण मांगा है। अदालत यह जानना चाहती है कि कितने मामले नाम जोड़ने और कितने मामले नाम हटाने से संबंधित हैं तथा अब तक उनके संबंध में क्या कार्रवाई हुई है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 80 सीटें मिलीं। सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव परिणाम के बाद SIR से जुड़ी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हुआ।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का केंद्र यह तय करना नहीं है कि चुनाव स्वतः रद्द होंगे या नहीं, बल्कि यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता सूची से जुड़े विवादों का वास्तविक चुनावी परिणामों पर कितना प्रभाव पड़ा। अदालत के सामने चुनाव आयोग का विस्तृत डेटा आने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा और स्पष्ट हो सकती है।
