TET में फेल हुए तो जाएगी नौकरी? 2028 तक मिला मौका, जानिए किन शिक्षकों को परीक्षा देना जरूरी और प्रमोशन पर क्या होगा
दरअसल TET की अनिवार्यता पहले मुख्य रूप से नई शिक्षक भर्ती से जुड़ी शर्त मानी जाती थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2025 के फैसले के बाद इसका दायरा पहले से सेवा में मौजूद शिक्षकों तक पहुंच गया। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग भी उठाई और तर्क दिया कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति TET अनिवार्य होने से पहले हो चुकी थी उन्हें बाद में इस नियम के दायरे में नहीं लाया जाना चाहिए। हालांकि कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून को बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य से जोड़ते हुए शिक्षक की योग्यता को महत्वपूर्ण माना।
अब सबसे अहम बात यह है कि हर सेवारत शिक्षक को TET देना जरूरी नहीं है। जिन शिक्षकों की सेवा में पांच साल से कम समय बचा है उन्हें TET की अनिवार्यता से राहत दी गई है। वहीं जिनकी सेवा में पांच साल से ज्यादा समय बाकी है उन्हें TET पास करना होगा। इसके लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। हालांकि जो शिक्षक प्रमोशन चाहते हैं उनके लिए TET की शर्त अलग है। सेवा में कितने भी साल बाकी हों प्रमोशन के लिए TET पास करना जरूरी होगा।
यही वजह है कि 2028 तक समय मिलने के बावजूद शिक्षक अभी से चिंतित हैं। सबसे बड़ी परेशानी नियमों की स्पष्टता को लेकर है। अलग-अलग समय पर नियुक्त हुए शिक्षकों को लेकर अभी भी कई सवाल बने हुए हैं। 2005 से 2009 के बीच भर्ती हुए करीब 70 हजार शिक्षकों की स्थिति को लेकर राज्य सरकार भी राहत की मांग कर रही है। इसके अलावा पुराने पात्रता परीक्षणों को TET के बराबर माना जाएगा या नहीं इस पर भी स्पष्टता का इंतजार है। इसी तरह पहले से TET या CTET पास कर चुके शिक्षकों को दोबारा परीक्षा देनी होगी या उनका पुराना प्रमाणपत्र मान्य होगा इसको लेकर भी शिक्षकों में असमंजस है।
नौकरी जाने का सवाल भी शिक्षकों की चिंता बढ़ा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक पात्र शिक्षकों को तय अवधि में TET पास करना होगा। निर्धारित समय तक योग्यता हासिल नहीं करने पर सेवा संबंधी कार्रवाई की स्थिति बन सकती है। वहीं प्रमोशन के लिए TET अनिवार्य रहेगा। कोर्ट ने 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा पास करने का मौका दिया है और राज्यों को नियमित रूप से परीक्षा आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद अतिरिक्त मोहलत नहीं दिए जाने की बात भी कही गई है।
शिक्षकों की दूसरी बड़ी चिंता परीक्षा के सिलेबस और कठिनाई स्तर को लेकर है। लंबे समय से कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षकों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी और नियमित शिक्षण कार्य दोनों को साथ संभालना आसान नहीं होगा। कुछ विषयों का स्तर ग्रेजुएशन तक होने की बात सामने आने से भी शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। ऑनलाइन परीक्षा भी कई वरिष्ठ शिक्षकों के लिए चुनौती बन सकती है क्योंकि उन्हें कंप्यूटर आधारित परीक्षा देने का पर्याप्त अभ्यास नहीं है।
फीस और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी मांगें उठ रही हैं। शिक्षक संगठन फीस माफ करने ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करने परीक्षा के दिन अवकाश देने और जरूरत पड़ने पर यात्रा भत्ता उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि शिक्षक अपनी नियुक्ति की तारीख सेवा अवधि पुराने TET या CTET प्रमाणपत्र और प्रमोशन की स्थिति के आधार पर अपनी पात्रता को स्पष्ट करें। 2028 तक मिला समय राहत जरूर है लेकिन नियमों की अस्पष्टता के बीच शिक्षकों के लिए यह परीक्षा अब नौकरी और करियर दोनों से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव बन गई है।
