पल्स ऑक्सीमीटर से जानें ऑक्सीजन स्तर, लगातार कमजोरी और बेचैनी दिखे तो इन संकेतों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं
ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर शरीर शुरुआत में इसकी भरपाई करने का प्रयास करता है। इस दौरान सांस लेने की गति बढ़ सकती है और दिल तेजी से धड़क सकता है। व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो सकती है। कुछ मामलों में थोड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद ही सांस फूलने लगती है, जबकि गंभीर स्थिति में आराम के समय भी सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि सांस फूलना केवल कम ऑक्सीजन का संकेत नहीं है। एनीमिया, चिंता, मोटापा, हृदय संबंधी समस्याओं और कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों में भी सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए अचानक शुरू हुई या लगातार बढ़ रही सांस की परेशानी को केवल थकान मानकर छोड़ना उचित नहीं है।
ऑक्सीजन की गंभीर कमी होने पर होंठ, नाखून या त्वचा का रंग नीला या नीला-सा दिखाई दे सकता है। इस स्थिति को सायनोसिस कहा जाता है। यदि किसी व्यक्ति के होंठ या चेहरा नीला पड़ने लगे और साथ में सांस लेने में परेशानी हो, तो यह गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है।
ऑक्सीजन कम होने का असर मस्तिष्क पर भी पड़ सकता है। पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने पर चक्कर आना, सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, भ्रम, असामान्य व्यवहार और अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ गंभीर मामलों में व्यक्ति को अत्यधिक नींद आने या बेहोशी जैसी स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है।
शरीर में ऑक्सीजन की स्थिति का आकलन करने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल किया जाता है। स्वस्थ लोगों में SpO₂ आमतौर पर 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहता है। हालांकि फेफड़ों या हृदय की कुछ बीमारियों वाले लोगों में सामान्य स्तर अलग हो सकता है। इसलिए ऑक्सीमीटर की रीडिंग को व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति के संदर्भ में समझना जरूरी है।
यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कुछ लोगों में ऑक्सीजन कम होने के बावजूद शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देते। इसलिए केवल यह देखकर कि सांस सामान्य चल रही है, ऑक्सीजन स्तर को सामान्य मान लेना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह और उचित जांच से वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाता है।
ऑक्सीजन कम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। निमोनिया, अस्थमा, सीओपीडी और फेफड़ों के संक्रमण जैसी स्थितियां सांस के जरिए शरीर में ऑक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। हृदय की कुछ बीमारियां, सांस लेने में रुकावट, फेफड़ों में रक्त का थक्का और अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना भी ऑक्सीजन स्तर को प्रभावित कर सकता है।
यदि सांस लेने में अचानक गंभीर परेशानी हो, होंठ या त्वचा नीली पड़ने लगे, भ्रम या बेहोशी जैसी स्थिति बने या व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो इसे गंभीर संकेत मानकर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। लगातार कमजोरी, चक्कर, बेचैनी या सांस से जुड़ी समस्या होने पर भी डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। समय पर कारण की पहचान और उपचार से गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
