August 22, 2026

शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से, 19 को अष्टमी-नवमी एक साथ, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाले नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान व्रत, दुर्गा सप्तशती पाठ, पूजा-अर्चना और कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। साल 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि अष्टमी और नवमी का पर्व 19 अक्टूबर को एक ही दिन मनाया जाएगा।

11 अक्टूबर को होगी घटस्थापना

पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर 2026 को रहेगी। इसी दिन घटस्थापना के साथ नवरात्र शुरू होंगे। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात करीब 9:19 बजे शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर माना जाएगा।

कलश स्थापना के लिए ये समय शुभ

11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त बताया गया है। इसकी अवधि करीब 3 घंटे 52 मिनट रहेगी। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। शहर के अनुसार सूर्योदय और स्थानीय पंचांग की गणना में थोड़ा अंतर होने के कारण मुहूर्त में बदलाव संभव है।

नौ दिनों में किस देवी की पूजा होगी
11 अक्टूबर – मां शैलपुत्री
12 अक्टूबर – मां ब्रह्मचारिणी
13 अक्टूबर – मां चंद्रघंटा
14 अक्टूबर – मां कूष्मांडा
15 अक्टूबर – मां स्कंदमाता
16 अक्टूबर – मां कात्यायनी
17 अक्टूबर – मां कालरात्रि
18 अक्टूबर – मां महागौरी
19 अक्टूबर – मां सिद्धिदात्री

19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी

2026 में तिथियों के क्रम में बदलाव के कारण दुर्गा अष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर, सोमवार को पड़ेंगी। ऐसे में अष्टमी-नवमी के पूजन, कन्या पूजन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन किए जाएंगे। संधि पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना चाहिए।

घर में ऐसे करें कलश स्थापना

सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। इसके बाद कलश में जल भरकर उसमें अक्षत, सुपारी और सिक्का डाल सकते हैं। कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर ऊपर नारियल स्थापित करें।

इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान कर पूजा का संकल्प लें और विधि-विधान से आराधना करें। जिन घरों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है, वहां दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है।

नवरात्र में इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्र के दौरान पूजा स्थल को स्वच्छ रखने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सात्विक भोजन किया जाता है और मांसाहार, शराब व अन्य तामसिक भोजन से परहेज रखा जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही उपवास करें। अखंड ज्योति जलाने पर उसे सुरक्षित स्थान पर रखें, ताकि आग लगने का खतरा न रहे।

20 अक्टूबर को विजयदशमी

नवरात्र के समापन के अगले दिन 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। कई स्थानों पर इसी दिन दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की परंपरा भी निभाई जाएगी।

शारदीय नवरात्र 2026 की प्रमुख तारीखें

पर्व – तारीख
नवरात्र प्रारंभ/घटस्थापना – 11 अक्टूबर 2026
दुर्गा अष्टमी – 19 अक्टूबर 2026
महानवमी – 19 अक्टूबर 2026
विजयदशमी – 20 अक्टूबर 2026

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