August 19, 2026

सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के लिए कॉजपा संस्थापक का सुझाव, जनप्रतिनिधि सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं अपने बच्चे

0
6-1787128141
नई दिल्ली । देश में सरकारी शिक्षा प्रणाली की स्थिति और उसमें आवश्यक सुधारों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक बयान जारी कर मांग की है कि शिक्षा विभाग से जुड़े सभी मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों, प्राचार्यों और शिक्षकों को अपने बच्चों का दाखिला अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में ही कराना चाहिए। उनका मानना है कि यदि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने बच्चों को इन संस्थानों में भेजेंगे, तो सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में बहुत जल्द सकारात्मक और व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा।

अभिजीत दीपके ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक सरकारी नीतियों को लागू करने वाले अधिकारी और जनप्रतिनिधि स्वयं इन सेवाओं का उपयोग नहीं करेंगे, तब तक वास्तविक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर क्यों अधिकारी और मंत्री अपने बच्चों को निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ाना पसंद करते हैं। क्या उन्हें अपने ही विभाग और सरकारी नीतियों की कार्यप्रणाली पर भरोसा नहीं है। उनका यह बयान देश भर में सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों के संदर्भ में आया है।

इस विचार को धरातल पर उतारने और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के उद्देश्य से उन्होंने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी का दौरा किया था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला परिषद द्वारा संचालित स्थानीय स्कूल में पहुंचे दीपके ने वहां की बुनियादी सुविधाओं का जायजा लिया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि कक्षाओं में खिड़कियों के शीशे टूटे हुए थे, सीसीटीवी कैमरे निष्क्रिय थे और स्वच्छता से जुड़ी कई मूलभूत सुविधाएं बदहाल स्थिति में थीं।

उनके द्वारा उजागर की गई कमियों के बाद स्थानीय प्रशासन और ग्राम पंचायत तुरंत हरकत में आई। संतुक पिंपरी के स्थानीय सरपंच विजय पुरी ने जानकारी दी है कि अभिजीत दीपके द्वारा चिन्हित की गई सभी समस्याओं को दूर करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया गया है। स्कूल में क्षतिग्रस्त खिड़कियों और उनके फ्रेम को बदला जा रहा है, नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, तथा शौचालयों में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए स्कूल प्रबंधन को मरम्मत कार्य जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश जारी किए हैं। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की ढांचागत स्थिति में तेजी से सुधार देखने को मिल रहा है।

मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता और सुविधाओं को लेकर समय-समय पर इस तरह की मांगें उठती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्वजनिक सेवाओं के उपयोग को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाए, तो इससे प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ती है। अभिजीत दीपके की इस पहल और उनके सुझाव ने एक बार फिर शिक्षा के अधिकार और सरकारी शैक्षणिक संस्थानों के स्तर को ऊंचा उठाने की दिशा में गंभीर मंथन शुरू कर दिया है।

0Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *