August 19, 2026

बारिश में रोज 2 से 4 सांपों का रेस्क्यू, 12 फीट के सांप से आधे घंटे चला मुकाबला; नाग पंचमी पर इंदौर में कड़ी निगरानी

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इंदौर । इंदौर में बारिश का मौसम शुरू होते ही सांपों के घरों और रिहायशी इलाकों में निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कभी घर के कमरे में सांप दिखाई देता है तो कभी कार ऑफिस गार्डन या किसी खाली जगह पर उसके निकलने की सूचना मिलती है। ऐसे में जब भी किसी के घर या आसपास सांप दिखाई देता है तो लोगों के बीच घबराहट फैल जाती है। लेकिन 65 वर्षीय कैलाशनाथ ऐसे लोगों के लिए मदद का भरोसा बन चुके हैं। पिछले 53 वर्षों से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ आज भी फोन आते ही अपना सामान उठाकर मौके की ओर निकल पड़ते हैं। समय दिन का हो या रात के 2 या 3 बजे का उनका प्रयास रहता है कि जरूरतमंद तक जल्द पहुंचा जा सके।

कैलाशनाथ ने महज 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। उन्होंने अपने माता पिता को सांप पकड़ते हुए देखा और धीरे धीरे इसी काम को सीखते चले गए। समय के साथ उन्होंने सांपों की अलग अलग प्रजातियों को पहचानने और उन्हें बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित तरीके से पकड़ने का अनुभव हासिल किया। आज उम्र 65 वर्ष हो चुकी है लेकिन सांपों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का उनका सिलसिला जारी है। बारिश के दिनों में उन्हें रोजाना करीब 2 से 4 सांपों के रेस्क्यू के लिए फोन आ रहे हैं।

कैलाशनाथ के अनुसार इंदौर में बारिश के दौरान रोजाना करीब 40 सांपों के निकलने की सूचनाएं सामने आ सकती हैं। इनमें ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते। उनके और उनके समुदाय के अन्य लोगों का काम सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ना है। उनका कहना है कि सांप को देखकर घबराने के बजाय लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि ज्यादातर घटनाओं में सांप खुद इंसान पर हमला नहीं करता बल्कि खतरा महसूस होने पर प्रतिक्रिया करता है।

कैलाशनाथ के रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मामले भी आए हैं जिन्हें वे आज तक नहीं भूल पाए हैं। किला मैदान में एक बार करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। आकार बड़ा होने के कारण वह आसानी से काबू में नहीं आ रहा था। उसे सुरक्षित पकड़ने में करीब 30 मिनट तक प्रयास करना पड़ा। कैलाशनाथ बताते हैं कि लगातार कोशिश के दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी लेकिन आखिरकार सांप को सुरक्षित तरीके से काबू में कर लिया गया और बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

कैलाशनाथ कहते हैं कि सांप देखकर ज्यादातर लोग डर जाते हैं और ऐसे समय में उन्हें किसी अनुभवी व्यक्ति की जरूरत होती है। उनका कहना है कि लोगों की परेशानी उनके लिए सबसे पहले है इसलिए रात के 2 या 3 बजे भी फोन आए तो वे मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समय देखकर काम करना संभव नहीं है। उनका सबसे बड़ा संदेश यही है कि सांप दिखने पर उसे छेड़ने या मारने की कोशिश न करें बल्कि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

सांप को पकड़ने के लिए कैलाशनाथ परिस्थिति के अनुसार अलग अलग उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। यदि सांप एक जगह बैठा हो या धीरे धीरे आगे बढ़ रहा हो तो छड़ी की मदद से उसके शरीर को नियंत्रित किया जाता है। इसके बाद उसे सावधानी से पकड़कर सुरक्षित थैली में रखा जाता है। अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो कैचर का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं यदि सांप किसी छेद बिल या सामान के पीछे छिपा हो तो आसपास की चीजों को धीरे धीरे हटाकर उसे बाहर आने दिया जाता है और फिर सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया जाता है। उनके मुताबिक सबसे ज्यादा खतरा तब पैदा होता है जब लोग खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करते हैं।

सांप के काटने की स्थिति में भी लोगों को झाड़ फूंक और घरेलू नुस्खों से बचने की जरूरत है। काटे गए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना घातक हो सकता है। घाव को काटना या जहर चूसने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शांत रखते हुए बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना जरूरी है।

इधर नाग पंचमी को देखते हुए इंदौर वन विभाग ने भी निगरानी बढ़ा दी है। सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन दल बनाए गए हैं। नवलखा भंवरकुआं रिंग रोड और आसपास के इलाकों की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा विजय नगर और शहरी क्षेत्र की निगरानी आशीष यादव संभालेंगे। वहीं अन्नपूर्णा लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी महेश सोनगरा को दी गई है। वन विभाग की टीमें शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी निगरानी करेंगी। ऐसे में नाग पंचमी के दौरान सांपों के साथ किसी भी तरह का प्रदर्शन या उन्हें लेकर घूमने की गतिविधि सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।

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