सरकारी फंड पर पलने वाली राजनीति! के बीच, बिना पद और बजट के जनसेवा कर रहे इस युवा नेता ने खड़ी की नई मिसाल!
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जनता बोली: स्ववित्त से कालाढूंगी को संवारने वाले इस समाजसेवी को क्यों न मिले विधायकी की कमान?
कालाढूंगी। उत्तराखंड की राजनीति में अमूमन यही देखा जाता है कि चुनाव आते ही नेता वादों की झड़ी लगा देते हैं और सरकारी बजट या योजनाओं के भरोसे विकास का दावा करते हैं। लेकिन आज कालाढूंगी की जनता के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा है—क्या आज तक कालाढूंगी के किसी भी नेता ने अपनी जेब से क्षेत्र के विकास के लिए एक रुपया भी लगाया है?
अगर निष्पक्षता से देखा जाए, तो इसका जवाब ढूँढना मुश्किल है। उल्टे कई नेताओं पर तो यह गंभीर संदेह और आरोप भी लगते रहे हैं कि जनता के विकास के लिए जो सरकारी पैसा आता है, उसमें से भी वे अपना हिस्सा निकाल लेते हैं। ऐसे में कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों एक बिल्कुल अलग और प्रेरणादायक तस्वीर उभरकर सामने आ रही है।
एक ओर जहाँ राजनीति को पद, पावर और पैसा कमाने का जरिया मान लिया गया है, वहीं इस क्षेत्र में एक ऐसा व्यक्तित्व (पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के ट्रस्टी गुंजन तिवारी) भी सक्रिय है जो बिना किसी सरकारी सहायता, एनजीओ फंड या राजनीतिक पद के, पूरी तरह अपने स्ववित्त से जनसेवा की अलख जगा रहा है।
स्वरोजगार से लेकर खेल और शिक्षा तक सीधा जुड़ाव
पुष्पा मेमोरियल फाउंडेशन के ट्रस्टी गुंजन तिवारी ने पलायन और बेरोजगारी की मार झेल रहे कालाढूंगी क्षेत्र में युवाओं को बाहर जाने से रोकने के लिए उन्होंने ठोस धरातलीय कदम उठाए हैं:
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* स्वरोजगार हेतु बिना ब्याज का ऋण: स्थानीय युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वे अपने व्यक्तिगत कोष से 1 वर्ष के लिए ब्याज-रहित लोन उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि युवा पलायन छोड़ क्षेत्र में ही रोजगार शुरू कर सकें।
* खेल प्रोत्साहन व नशा मुक्ति: युवाओं को नशे के दुचक्र से बचाकर उनकी ऊर्जा को सही दिशा देने के लिए खेल सामग्री व सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
* शिक्षा व स्वास्थ्य में सहयोग: प्रतिभावान व निर्धन बच्चों को छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) देना हो या दूरस्थ गांवों में मेडिकल स्वास्थ्य शिविर लगाना, ये सभी कार्य नियमित रूप से जारी हैं।
ये सभी कार्य किसी सरकारी बजट या बाहरी चंदे से नहीं, बल्कि एक फाउंडेशन के माध्यम से उनकी खुद की गाढ़ी कमाई से संचालित हो रहे हैं।
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जनता का रुझान: “जो बिना पद के इतना कर सकता है, उसे मौका क्यों नहीं?”
इस निस्वार्थ प्रयास ने कालाढूंगी की आम जनता के मन में एक गहरा विश्वास पैदा किया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं के बीच अब यह चर्चा आम हो चुकी है कि जो व्यक्ति बिना किसी पद या सरकारी बजट के अपनी जेब से समाज के लिए इतना काम कर सकता है, यदि उसे जनप्रतिनिधि के रूप में विधायक की जिम्मेदारी मिले, तो वह क्षेत्र का कितना अभूतपूर्व विकास करेगा।
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क्षेत्रीय जनता का पक्ष:
> क्षेत्र की जनता से चर्चा के दौरान लोगों का कहना था कि “आज तक किसी नेता ने अपनी जेब से ₹100 भी खर्च नहीं किए, बल्कि सरकारी फंड का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं, इस पर भी सवाल खड़े होते रहते हैं। ऐसे दौर में अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों, युवाओं और मरीजों पर लगाना बहुत बड़ी बात है। जो बिना पद के इतना कर रहा है, उसे विधायक बनने पर क्षेत्र की तरक्की करने से कौन रोक सकता है? ऐसे ही स्वच्छ और समर्पित व्यक्ति को विधानसभा पहुँचना चाहिए।”
यहां तक की आरएसएस व भाजपा जुड़े रह चुके कई बुजूर्गों तक का यह मानना है कि गुंजन तिवारी की पहल क्षेत्र को विकास देने में सक्षम है। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात कार्यक्रम से चर्चा में आ चुके कालाढूंगी विधानसभा क्षेत्र में रहने वाले जीवन चंद्र जोशी तक उन्हें कालाढूंगी के लिए वरदान बता चुके हैं।
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राजनीति से परे, केवल सेवा का संकल्प
यह पूरी पहल यह स्पष्ट संदेश देती है कि नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं, बल्कि धरातल पर किए गए कार्यों से सिद्ध होता है। बिना किसी राजनीतिक लालच के, अपनी व्यक्तिगत आय से किया जा रहा यह सामाजिक निवेश आने वाले समय में कालाढूंगी की राजनीतिक और सामाजिक दिशा तय करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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