7 दिन बाद भी इंदौर के अद्वैत का सुराग नहीं, 'स्पाइडर मैन' ने संभाला मोर्चा; ChatGPT सर्च से गहराया रहस्य
ज्योति राज को कर्नाटक में ‘स्पाइडर मैन’ और ‘मंकी मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। बेहद खड़ी चट्टानों पर चढ़ने की अपनी क्षमता के कारण वह पहले भी कई मुश्किल रेस्क्यू अभियानों में मदद कर चुके हैं। अद्वैत की तलाश के दौरान उन्होंने शांताला ड्रॉप और आसपास की खतरनाक ढलानों पर रस्सियों की मदद से सर्च किया। इन इलाकों में सामान्य टीमों के लिए पहुंचना मुश्किल है। इसलिए ज्योति राज की मदद को सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अद्वैत 7 अगस्त की सुबह मोटरसाइकिल से शिवगंगे पहुंचा था। पुलिस को मिले CCTV फुटेज में उसके पहाड़ी की तरफ जाते और चढ़ाई शुरू करने के संकेत मिले हैं। उसकी किराए की बाइक पहाड़ी की तलहटी में मिली थी। इसके बाद जब वह तय समय तक वापस नहीं लौटा तो उसकी तलाश शुरू की गई। ऑपरेशन में NDRF और SDRF के साथ पुलिस तथा वन विभाग के जवान भी जुटे हैं। करीब 100 कर्मियों की टीमें अलग-अलग हिस्सों में तलाश कर रही हैं और कठिन इलाकों की निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
जांच में उस समय नया मोड़ आया जब अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन शांताला ड्रॉप के पास मिले। इससे पहले आसपास उसका बैग और स्वेटर भी मिलने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस अब इन सभी सामानों के मिलने की जगह को जोड़कर अद्वैत की आखिरी गतिविधियों की टाइमलाइन तैयार कर रही है। मोबाइल की लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड समेत डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस ने अद्वैत के अन्य संभावित मोबाइल नंबर और SIM कार्ड की जानकारी भी जुटानी शुरू की है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसके नाम पर कोई दूसरा SIM तो जारी नहीं हुआ था। इसके साथ ही 6 और 7 अगस्त को उसने किन लोगों से बात की और उसके लापता होने के बाद किन लोगों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की थी इसकी भी पड़ताल की जा रही है। उसकी मंगेतर और अन्य परिचितों से जुड़े संपर्कों को भी जांच के तकनीकी पहलू के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल पुलिस ने किसी व्यक्ति को आरोपी या संदिग्ध नहीं बताया है।
इस मामले में अद्वैत की ऑनलाइन सर्च हिस्ट्री भी जांच का अहम हिस्सा बन गई है। पुलिस के अनुसार उसके लैपटॉप में शिवगंगे की ऊंचाई और ट्रैकिंग रूट से जुड़ी जानकारी खोजे जाने के संकेत मिले हैं। इसके अलावा आत्महत्या से जुड़े स्थानों और पहाड़ी से गिरने के संभावित परिणामों को लेकर ऑनलाइन जानकारी खोजे जाने की बात भी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस इसी आधार पर आत्महत्या के एंगल की भी जांच कर रही है। हालांकि केवल इंटरनेट या ChatGPT पर की गई सर्च के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। पुलिस इसे अन्य डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ जोड़कर देख रही है।
जांच में 4 अगस्त को भी अद्वैत की शिवगंगे से जुड़ी गतिविधियों के संकेत मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि अगर वह 4 अगस्त को भी इस इलाके में गया था तो 7 अगस्त को दोबारा वहां जाने की वजह क्या थी। इसी के साथ उसके ड्रोन की खरीद और आखिरी उड़ान की जानकारी भी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में लगी है कि ड्रोन में कोई फोटो वीडियो या अन्य डिजिटल डेटा मौजूद है या नहीं।
फिलहाल सात दिन बीतने के बाद भी अद्वैत का कोई पुख्ता सुराग नहीं मिला है। सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और दुर्गम चट्टानों वाले इलाकों में विशेषज्ञों की मदद से तलाश को और व्यापक बनाया जा रहा है। अद्वैत के परिवार और करीबी लोगों की उम्मीदें अब भी रेस्क्यू टीमों से जुड़ी हुई हैं।
