गाजा में युद्धविराम की अमेरिकी पहल को झटका, नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ अभियान रोकने से इनकार किया
अमेरिका की पहल के तहत गाजा में युद्ध को रोकने, इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी और हमास के हथियार छोड़ने जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप की प्रस्तावित 15 सूत्रीय योजना का उद्देश्य संघर्ष को एक नए चरण में ले जाना और गाजा में सुरक्षा तथा प्रशासन से जुड़ी व्यवस्था तैयार करना है।
योजना में हमास के हथियारों को धीरे-धीरे गाजा के लिए प्रस्तावित नए प्रशासनिक ढांचे को सौंपने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही इजरायली सेना को कुछ निर्धारित क्षेत्रों से पीछे हटाने की बात भी शामिल है। इस व्यवस्था में एक तथाकथित येलो लाइन का जिक्र किया गया है, जिसके आसपास सैन्य स्थिति में बदलाव प्रस्तावित है।
अमेरिकी योजना के तहत इजरायल की सैन्य कार्रवाई को उन लोगों तक सीमित करने की बात भी सामने आई है, जिन्हें तत्काल सुरक्षा खतरा माना जाए। इसका उद्देश्य व्यापक सैन्य अभियान को कम करना और गाजा में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में आगे बढ़ना बताया जा रहा है।
हालांकि, नेतन्याहू का रुख इन प्रस्तावों से अलग दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा है कि जब तक हमास अपने हथियार पूरी तरह नहीं छोड़ता, तब तक इजरायली सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। इस रुख का सीधा अर्थ यह है कि इजरायल हमास के सैन्य ढांचे और हथियारों को पूरी तरह समाप्त करने को अपनी कार्रवाई रोकने की प्रमुख शर्त मान रहा है।
नेतन्याहू की स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब गाजा में युद्धविराम और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत जारी है। अमेरिका इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इजरायल की सुरक्षा संबंधी शर्तें और हमास के हथियारों का मुद्दा किसी भी समझौते के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं।
इजरायल का कहना है कि हमास के पास हथियार और सैन्य क्षमता रहने की स्थिति में भविष्य में फिर से हमले का खतरा बना रहेगा। इसी कारण इजरायली नेतृत्व किसी ऐसे समझौते को स्वीकार करने से बच रहा है, जिसमें सैन्य वापसी तो हो लेकिन हमास की हथियारबंद क्षमता पूरी तरह समाप्त न हो।
दूसरी ओर, गाजा में लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष ने मानवीय संकट को गंभीर बनाया है। युद्धविराम की किसी भी पहल में नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय सहायता की पहुंच और भविष्य के प्रशासन का सवाल भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका की योजना को लागू कराने के लिए इजरायल और अन्य संबंधित पक्षों के बीच सहमति जरूरी होगी।
फिलहाल गाजा फेस-2 योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अमेरिका युद्धविराम और सैन्य वापसी की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है, जबकि नेतन्याहू हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण को प्राथमिक शर्त मान रहे हैं। दोनों पक्षों के रुख में यह अंतर आने वाले दिनों में बातचीत की दिशा और गाजा में सैन्य गतिविधियों पर असर डाल सकता है।
