August 12, 2026

दूषित पानी और संक्रमण से बच्चों की मौत का मामला गरमाया, दिग्विजय बोले- दोषियों पर हो कड़ी कार्रवाई

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भोपाल। बालाघाट जिले के आदिवासी विकासखंड बिरसा में बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने का मामला गंभीर होता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस पूरे मामले पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने कथित दूषित पानी और संक्रमण से पैदा हुई बीमारियों की राज्य स्तर पर जांच कराने तथा लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है। दिग्विजय सिंह ने मृत बच्चों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और गंभीर रूप से बीमार बच्चों को बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कराने की भी मांग रखी है।

दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में दावा किया है कि बिरसा क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह के दौरान 11 आदिवासी बच्चों की बीमारी से मौत हुई है। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से अब तक सात बच्चों की मौत की पुष्टि किए जाने की बात पत्र में कही गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार अन्य बच्चों की मौत की जानकारी सामने नहीं लाई जा रही है। उनके मुताबिक बालाघाट जिला चिकित्सालय में 100 से अधिक बच्चों को भर्ती कराया गया है और इनमें कई बच्चों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।

बिरसा क्षेत्र के कई गांवों में बुखार और संक्रमण से लोग परेशान बताए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने पत्र में कहा है कि मलेरिया, निमोनिया, सर्दी-खांसी और चर्म रोग जैसी बीमारियों का असर कई गांवों में देखने को मिल रहा है। जिला मुख्यालय से करीब 100 किलोमीटर दूर स्थित बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका से जुड़े टोले-मजरों में बीमारी को लेकर डर का माहौल बताया गया है। पत्र के मुताबिक कई परिवारों में बच्चे तेज बुखार से जूझ रहे हैं।

दिग्विजय सिंह ने आदिवासी नेता शुभम उईके के हवाले से जिला अस्पताल की स्थिति का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार अस्पताल का बच्चा वार्ड बीमार बच्चों से भर गया है। उन्होंने बोंदारी गांव के समारू धुर्वे के बच्चों साहिल और नामिन की निमोनिया से मौत का जिक्र करते हुए कहा कि बीमारी ने कई गरीब परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है। वहीं अन्य प्रभावित परिवारों के बच्चों की मौत का भी पत्र में उल्लेख किया गया है।

इस मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रभावित परिवारों से मिलने और उपचार की व्यवस्था को लेकर अधिकारियों से चर्चा करने की बात भी सामने आई है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजाति में शामिल बैगा आदिवासी परिवारों के सामने बीमारी ने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। उन्होंने इसे केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और साफ पानी की उपलब्धता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव के साथ चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम प्रभावित गांवों का दौरा करे। उन्होंने संक्रमित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप लगाकर बच्चों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग रखी है।

दिग्विजय सिंह ने गंभीर रूप से बीमार बच्चों को जरूरत पड़ने पर एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के बेहतर चिकित्सा केंद्रों में भर्ती कराने और उनका पूरा इलाज राज्य सरकार की ओर से कराने की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और राज्य स्तरीय जांच के बाद यदि किसी विभाग या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।

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