जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों की टीम दलमा रेंज के तराई इलाकों में बड़े नक्सली कमांडरों की तलाश में उतरी थी। सुरक्षा बल एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम जब बाटालुका गांव पहुंची तो एक स्थानीय निवासी और उसकी दो पत्नियों को पूछताछ के लिए साथ ले जाने लगी।
संदेह के आधार पर की जा रही इस कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद बालिका के रोने पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और पूर्व से पुलिस हिरासत में रखे गए एक अन्य ग्रामीण को भी मुक्त किया जाए। बारिश के बीच सुबह पांच बजे से दस बजे तक सुरक्षा बल गांव में फंसे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करते रहे।
घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास शुरू हुए। स्थानीय जिला पार्षद के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद पूर्व में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मौके पर लाया गया। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनी और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे के भारी तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो सकी।
उल्लेखनीय है कि बाटालुका और आसपास के तराई क्षेत्र लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों के केंद्र में रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आवाजाही करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखती हैं ताकि नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
झारखंड की इस घटना के बाद सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल इस प्रकार के अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के गतिरोध से बचा जा सके।
