JPSC विवाद के बीच झारखंड सरकार का बड़ा फैसला, तीन परीक्षाओं पर संकट और जांच को लेकर सामने आया नया अपडेट
नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब सरकार और अभ्यर्थियों के बीच बातचीत के महत्वपूर्ण दौर में पहुंच गया है। रांची में सरकार और आंदोलन कर रहे छात्रों के बीच तीसरे दौर की बैठक हुई, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, पुरानी परीक्षाओं और भर्ती व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान सरकार की ओर से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार किए जाने के संकेत मिले हैं।
बैठक में सबसे अहम मुद्दा परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच का रहा। सरकार वित्तीय लेनदेन की जांच प्रवर्तन निदेशालय यानी ED से कराने के लिए तैयार बताई जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मामलों की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई है।
छात्रों की प्रमुख मांगों में कुछ पुरानी परीक्षाओं को रद्द करना भी शामिल रहा है। बातचीत के दौरान JPSC बैकलॉग 2023, JPSC बैकलॉग 2025 और 14वीं प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की बात रखी गई। इन परीक्षाओं को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच असंतोष बना हुआ है। सरकार की ओर से इन तीन परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति की बात सामने आने के बाद बातचीत का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके अलावा परीक्षा आयोजित कराने वाली TDPL एजेंसी की भूमिका को लेकर भी चर्चा हुई। सरकार की ओर से TDPL एजेंसी द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच करने की बात कही गई है। इससे परीक्षा संचालन की प्रक्रिया, उससे जुड़े निर्णयों और संभावित अनियमितताओं की व्यापक समीक्षा का रास्ता खुल सकता है।
छात्रों की मांग केवल मौजूदा परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग भी कर रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार JPSC और JSSC की परीक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में बदलाव की दिशा में भी काम करने की तैयारी में है।
सरकार की ओर से भर्ती व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विशेषज्ञ संस्थानों की मदद लेने का प्रस्ताव भी सामने आया है। इसके लिए IIM और XISS जैसे संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग किए जाने की संभावना बताई गई है। इसका उद्देश्य परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है, ताकि भविष्य में अभ्यर्थियों को इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी युवाओं की चिंताओं को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि सरकार युवाओं की समस्याओं को समझती है और सरकारी व्यवस्था से जुड़ी वजहों के कारण ही युवा आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा में हुई गड़बड़ी को सरकार ने संज्ञान में लिया है और गलत काम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आंदोलन कर रहे छात्रों से अपनी बात बिना किसी डर के सरकार तक पहुंचाने की अपील की है। सरकार और छात्रों के बीच हुई तीसरे दौर की बातचीत के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रस्तावित फैसलों को किस रूप में लागू किया जाता है। तीन परीक्षाओं को रद्द करने, वित्तीय लेनदेन की जांच और भर्ती व्यवस्था में बदलाव को लेकर सरकार की अगली कार्रवाई छात्र आंदोलन की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।
