वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट पहुंच सकता है भारतीय कार बाजार: आरसी भार्गव
आरसी भार्गव के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की भविष्य की वृद्धि का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया जीएसटी सुधारों से केवल वाहन उद्योग को ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी गति मिली है। कंपनी अगले पांच वर्षों के दौरान कार बाजार की संभावित वृद्धि का अधिक सटीक अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया में है।
मारुति सुजुकी इंडिया की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक एकीकृत रिपोर्ट में कंपनी के कारोबार और भविष्य की रणनीति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छोटी कारों के बाजार में सुधार, एसयूवी पोर्टफोलियो की मजबूती, अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात में बेहतर प्रदर्शन ने कंपनी की वृद्धि को समर्थन दिया है।
वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने 24.22 लाख वाहनों की रिकॉर्ड वार्षिक बिक्री दर्ज की। यह कंपनी की अब तक की सबसे अधिक सालाना बिक्री है। इसी अवधि में कंपनी ने 4.47 लाख वाहनों का निर्यात किया, जो उसके निर्यात कारोबार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
कंपनी लगातार तीसरे वर्ष 20 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री करने में सफल रही है। आरसी भार्गव ने बिक्री के अगले दस लाख यूनिट के माइलस्टोन को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि कंपनी इस उपलब्धि को पहले की अपेक्षा जल्दी हासिल करने को लेकर आशावादी है।
मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को तेज किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी ने 5 लाख यूनिट की अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी है। इसका उद्देश्य बदलती मांग और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन को मजबूत करना है।
ताकेउची ने कहा कि भारतीय ग्राहकों की पसंद और अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपने एसयूवी पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। मारुति सुजुकी अगले पांच से छह वर्षों में सात नई एसयूवी लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है।
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में घरेलू मांग के साथ निर्यात, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी ने विनिर्माण, निर्यात, तकनीकी विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और टिकाऊ मोबिलिटी के माध्यम से देश की आर्थिक विकास यात्रा में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है।
कंपनी के अनुसार, भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य में ऑटोमोबाइल उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में कार बाजार का संभावित विस्तार केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन, रोजगार, निर्यात और तकनीकी क्षमताओं को भी प्रभावित कर सकता है।
