August 8, 2026

ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।

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नई दिल्ली ।
देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित यानी ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की इस नीति की नीयत और निष्पादन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कहावत है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन ई20 पेट्रोल के मामले में तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से देश की आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और यह सीधे तौर पर लोगों की जेब काटने जैसा है।

राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए वीडियो में स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से चारपहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के इंजन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों का माइलेज घटने के कारण लोगों को ईंधन पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। विपक्षी नेता ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और इसके खिलाफ आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जन-अभियान चलाया जाएगा।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि ई20 लागू करते समय सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। पार्टी के अनुसार, अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध कराए जाने के कारण वाहन मालिकों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। विपक्ष का आरोप है कि माइलेज कम होने से उपभोक्ताओं पर अरबों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक वित्तीय लाभ केवल इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को ही मिल रहा है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस नीति को देशहित और पर्यावरण के अनुकूल बताकर इसका बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा बचाना है। इसके साथ ही, इथेनॉल उत्पादन से देश के गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य मिलने की बात कही गई है। हालांकि, विपक्ष अब इस मुद्दे को आम जनता के आर्थिक नुकसान से जोड़कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे इस विषय पर आने वाले समय में राजनीतिक पारा और चढ़ने की पूरी संभावना है।

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