भारत-चीन सीमा वार्ता में डिलिमिटेशन, सीमा प्रबंधन और ट्रांस-बॉर्डर सहयोग पर बातचीत, एलएसी पर शांति बनाए रखने पर जोर
बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई चीन के विदेश मंत्रालय के बाउंड्री और ओशनिक अफेयर्स डिपार्टमेंट की महानिदेशक होउ यांकी ने की। दोनों पक्षों के बीच बातचीत को स्पष्ट और व्यावहारिक बताया गया। चर्चा का मुख्य उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने और लंबित मुद्दों के समाधान के लिए संवाद को आगे बढ़ाना रहा।
भारत और चीन ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। एलएसी पर किसी भी तरह की गलतफहमी या गलत आकलन को रोकने के लिए दोनों पक्षों ने मौजूदा राजनयिक और सैन्य माध्यमों का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति जताई।
इन माध्यमों में डब्ल्यूएमसीसी के अलावा स्थानीय कमांडर स्तर की बैठकें और पहले से निर्धारित अन्य संवाद तंत्र शामिल हैं। दोनों देशों का मानना है कि नियमित बातचीत के जरिए सीमा पर पैदा होने वाली परिस्थितियों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है और लंबित मामलों के समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
बैठक में 24वें विशेष प्रतिनिधि स्तर के दौर की वार्ता के परिणामों के बाद सीमा से जुड़े विषयों पर आगे चर्चा की गई। इसमें सीमा निर्धारण, सीमा प्रबंधन, संस्थागत तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इन क्षेत्रों में आपसी संवाद और समन्वय बनाए रखने की जरूरत पर सहमति जताई।
भारत ने सीमा पार नदियों से संबंधित विशेषज्ञ स्तर के तंत्र की अगली बैठक जल्द आयोजित करने की आवश्यकता भी दोहराई। भारतीय पक्ष ने विशेष रूप से चीन की ओर से ऊपरी क्षेत्रों में प्रस्तावित या संचालित परियोजनाओं से जुड़े तकनीकी विवरण साझा करने के महत्व पर जोर दिया। सीमा पार नदियों से जुड़े विषय भारत के लिए रणनीतिक और पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।
भारत और चीन के संबंधों में हाल के समय में लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने से जुड़े कुछ कदम भी उठाए गए हैं। इनमें कैलाश मानसरोवर यात्रा की दोबारा शुरुआत और दोनों देशों के बीच नागरिक विमानन संपर्क बहाल करना शामिल है। इन कदमों को दोनों देशों के बीच जनस्तरीय संपर्क सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने भी भारत-चीन संबंधों में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई है। मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए लोगों के बीच संपर्क बेहतर करने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। भारत का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक माहौल मजबूत हो सकता है।
इस बीच चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भारतीयों और भारतीय संस्कृति के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री बढ़ने को लेकर भी भारतीय समुदाय की चिंताएं सामने आई हैं। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास के एक खुले संवाद कार्यक्रम में समुदाय के सदस्यों ने यह मुद्दा उठाया था। सीमा संबंधी बातचीत के साथ लोगों के बीच संपर्क और आपसी विश्वास मजबूत करना भी भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।
