JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच छात्रों के पक्ष में बोलीं सोनाक्षी सिन्हा, निष्पक्ष जांच की मांग को मिला बल
सोनाक्षी सिन्हा ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर झारखंड के छात्र आंदोलन से जुड़ी एक वीडियो पोस्ट साझा की। इसके साथ उन्होंने लिखा कि देश के छात्रों को इस तरह संघर्ष करते देखना बेहद दुखद है और यह स्थिति कब समाप्त होगी, यह सबसे बड़ा सवाल है। उनकी इस टिप्पणी को कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने छात्रों के प्रति संवेदनशीलता और समर्थन के रूप में देखा। वहीं कुछ लोगों ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
झारखंड में छात्र 29 जुलाई से रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना दे रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का आरोप है कि JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हुई हैं। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे और योग्य अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके। छात्रों का आरोप है कि अब तक हुई कार्रवाई उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रही है।
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग 19 अप्रैल को आयोजित 14वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की है। इसके अलावा वे भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने तथा OMR शीट में ‘Not Attempted’ का अलग विकल्प जोड़ने की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और निष्पक्ष बन सकेगी।
छात्रों ने यह भी दावा किया है कि पहले सामने आए प्रश्नपत्र लीक प्रकरणों ने भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि पारदर्शी जांच नहीं हुई तो हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। प्रदर्शन में शामिल कई छात्रों का कहना है कि वे लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं और उन्हें केवल निष्पक्ष अवसर की अपेक्षा है।
इस बीच विभिन्न सामाजिक और सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने छात्रों की मांगों का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने मामले के शीघ्र समाधान और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता बताई है। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी जारी है। हालांकि संबंधित संस्थाओं की ओर से समय-समय पर जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने एक बार फिर परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध और निष्पक्ष जांच के साथ ऐसी व्यवस्थाएं विकसित करना आवश्यक है, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे और भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
